बहराइच। कारोबारी मसालों व अन्य खाद्य पदार्थो में हानिकारक रंगों का प्रयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं। इसका खुलासा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की मोबाइल लैब में जांच के दौरान सामने आया है। विभाग ने 59 नमूनों की जांच की थी जिसमें 21 फेल हो गए। उड़ड की दाल, मिर्च पाउडर व हरी मिर्च के सॉस में सबसे ज्यादा हानिकारक रंगों का प्रयोग मिला। काली मिर्च व अन्य खाद्य पदार्थ अधोमानक पाए गए। हालांकि, मामले में अधिकारियों ने संबंधित व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई न करते हुए सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया है।
कारोबारियों अधिक मुनाफे के चक्कर में मिलावटखोरी कर लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। समय-समय पर इसका खुलासा होता रहता है। बुधवार को यह बात फिर साबित हुई। एफएसडीए के डीओ विनोद शर्मा की अगुवाई में एफएसओ राघवेंद्र प्रताप वर्मा, डॉ. रामतेज व विवेक कुमार की टीम ने मोबाइल लैब के माध्यम से नवाबगंज व रिसिया में अभियान चलाया। मोबाइल लैब में टीम ने 59 नमूनों की जांच की। जांच के दौरान विभाग को उड़द की दाल के सात नमूने, सौंफ के तीन, हरी मिर्च के सॉस का एक व हल्दी के दो नमूनों में हानिकारक रंग का प्रयोग मिला।
इसके अलावा काली मिर्च, माउथ फ्रेशनर व बर्फी का नमूना अधोमानक पाया गया। टीम ने डोम 24 जांच मशीन से तेल के सात नमूनों की जांच की जिसमें एक नमूना फेल पाया गया। टीम ने सभी कारोबारियों को चेतावनी देकर छोड़ दिया। डीओ विनोद शर्मा ने बताया कि होटलों पर समोसा आदि तलने के लिए जिस तेल का इस्तेमाल होता है उसमें अधिकतम तीन बार खाद्य पदार्थों को तलने की व्यवस्था है। इससे अधिक तलने पर तेल की गुणवत्ता शून्य हो जाती है। तेल हानिकारक हो जाता है। उन्होंने बताया कि इस तरह के तेल के सात नमूनों में से एक फेल हो गया। मसाले व खाद्य पदार्थों के 59 नमूनों में 21 फेल मिले। डीओ ने बताया कि सभी को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। दोबारा जांच में गड़बड़ी पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।