नेपाल के पहाड़ों पर बरसात रुकने व बैराजों से कम मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद धीरे-धीरे सरयू का जलस्तर कम होना शुरू हो गया है। सोमवार की दोपहर सरयू नदी खतरे के निशान से 17 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी, लेकिन मंगलवार को नदी का जलस्तर कम हुआ है। इसके बाद भी जरवलरोड स्थित एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से आठ सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर कम होने के साथ ही सरयू की कटान भी तेज हो गई है।
बीते दो दिनों में विभिन्न स्थानों पर अब तक लगभग 110 बीघा कृषि योग्य भूमि कटान की भेंट चढ़ चुकी है। मंगलवार को भी कई आवासीय मकान नदी की जलधारा में समाहित हो गए जिससे ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं हैं। तहसील महसी, कैसरगंज व जरवलरोड में सरयू का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है। जलस्तर घटने के साथ ही नदी ने कटान का सिलसिला तेज कर दिया है। तहसील कैसरगंज के भिरगुपुरवा, ग्यारह सौ रेती व तीन सौ रेती तथा तहसील महसी अंतर्गत ग्राम पंचायत टिकुरी के मजरा पसियनपुरवा में नदी ने लगभग एक दर्जन ग्रामीणों की 50 बीघा कृषि योग्य भूमि काट दी है। इस भूमि पर वर्तमान समय में धान की फसल लगी हुई थी। यहां रामचरण, शिव कैलाश व सुंदरलाल केआवासीय मकान भी कटान की भेंट चढ़ गए हैं। कैसरगंज के गोड़हिया नंबर तीन में मंझारा तौकली निवासी सुयश पत्नी सत्यनारायण, रामनवल व लखन के भी मकान कटान की जद में आ गए।
उधर, जरवलरोड अंतर्गत अहाता ग्राम पंचायत के दमरीपुरवा निवासी मुंशी लाल का लगभग दस बीघा खेत भी नदी की जलधारा में समा गया। इसके साथ ही राधेश्याम, रामनाथ, रामप्रकाश, केशवराम व संतराम समेत अन्य कई ग्रामीणों की कृषि योग्य लगभग 60 बीघा भूमि भी कटान की भेंट चढ़ गई हैं। नदी का जलस्तर कम होने के बाद तेजी से हो रही कटान से ग्रामीणों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ से अब तक सैकड़ों ग्रामीणों की कृषि योग्य भूमि नदी की जलधारा में समाहित हो गई है जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कटान के कारण तटवर्ती ग्रामीणों में अफरा-तफरी मची हुई है। इन गांवों में निवासरत लोगों का कहना है कि बाढ़ आने पर गृहस्थी का आवश्यक सामान एकत्र कर किसी प्रकार सुरक्षित स्थान पर जाकर अपनी जान बचाई जा सकती है, लेकिन कटान के कारण कृषि योग्य भूमि गंवाने से उनके सामने रोजी-रोटी का भी संकट उत्पन्न हो जाता है।
बाढ़ खंड के सहायक अभियंता बीबी पाल ने बताया कि मंगलवार को बैराजों से दो लाख, 79 हजार, 110 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया है। एल्गिन ब्रिज पर सरयू नदी खतरे के निशान से आठ सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। अगले कुछ समय में नदी का जलस्तर और कम होने की संभावना है।
सरयू में प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ व कटान ने अब तक सैकड़ों लोगों को काफी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। तहसील महसी व कैसरगंज में काफी संख्या में ऐसे परिवार थे जिनके पास सैकड़ों बीघा कृषि योग्य भूमि थी। भूमि के सहारे उनका बेहतर तरीके से जीवनयापन तो होता ही था दर्जनों लोगों को उनके यहां रोजगार भी मिलता था, लेकिन अब स्थिति यह हो गई है कि इन परिवारों को दो जून की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। गोलागंज, कपरवल, चुरईपुरवा व गंगापुरवा निवासी ऐसे कई परिवारों के सदस्य आज तटबंध पर छोटी-मोटी किराने की दुकान या फिर मेहनत मजदूरी करने पर विवश हैं।
सरयू का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। इस कारण कटान हो रही है। क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। कटान पीड़ित परिवारों को सहायता प्रदान की जाएगी। - रामदास, एसडीएम।