बहराइच। जिलेभर में विकास कार्यों की देखरेख के लिए तैनात किए गए रोजगार सेवकों का ईपीएफ खतरे में दिख रहा है। उनके खाते से कट रहा ईपीएफ का पैसा कहां है, ये उन्हीं को नहीं पता है। इस सिलसिले में कई बार रोजगार सेवकों ने उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिखे। रोजगार सेवकों का दावा है कि 10 महीने से उनके ईपीएफ खाते में एक भी पैसा नहीं दिखा जबकि हर महीने 2212 रुपये उनके वेतन से कट रहा है। ईपीएफ कटौती की धनराशि लगभग दो करोड़ बताई जा रही है। रोजगार सेवकों के दर्जनों शिकायती पत्र देने के बाद भी हुक्मरान मौन हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत होने वाले विकास कार्यों के निष्पादन के लिए जिले में 853 ग्राम रोजगार सेवक तैनात हैं। पूर्व में इन्हें 6000 हजार रुपये का मानदेय दिया जाता था। बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे बढ़ाकर 10000 हजार रुपये कर दिया। 28 अक्टूबर, 2021 को अपर आयुक्त मनरेगा अखिलेश कुमार सिंह ने पत्र जारी कर रोजगार सेवकों की ईपीएफ कटौती की गणना बढ़े हुए मानदेय के आधार पर करने का निर्देश जारी किया। इसके तहत रोजगार सेवकों के 10000 हजार मानदेय में से 2212 रुपये ईपीएफ कटौती तय की गई। साथ ही आयुक्त ने ईपीएफ कटौती एक अक्टूबर, 2021 से करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से जिले में कार्यरत सभी 853 ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय से प्रतिमाह 2212 रुपये कर्मचारी भविष्य निधि खाते के लिए काटे जा रहे हैं, लेकिन रोजगार सेवकों के ईपीएफ खातों में यह धनराशि नहीं पहुंच रही है।
853 ग्राम रोजगार सेवकों के प्रतिमाह 2212 रुपये की कटौती के हिसाब से सिर्फ एक माह की धनराशि 18,86,836 रुपये हो जाती है जबकि कटौती 10 महीनों से हो रही है। ऐसे में यह राशि बढ़कर 1,88,68,380 रुपये हो गई है। वहीं, कुछ ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि पूर्व में भी ईपीएफ कटौती होती थी। उसका भी भुगतान ईपीएफ खाते में नहीं हुआ है। इस तरह लगभग दो करोड़ रुपये ग्राम रोजगार सेवकों के हैं जो ईपीएफ के लिए मानदेय से काट तो लिए गए हैं, लेकिन खाते में नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में कर्मचारी घोटाले की आशंका जता रहे हैं। संवाद
ग्राम रोजगार सेवक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पंकज मिश्रा ने बताया कि रोजगार सेवकों के ईपीएफ के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र देकर समस्या के निराकरण की मांग की गई। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, डीसी मनरेगा व खंड विकास अधिकारियों को पत्र देकर रोजगार सेवकों की गायब हो रही भविष्य निधि का पता लगवाने व उसे उनके ईपीएफ खाते में भुगतान करवाने की मांग की गई है। हालांकि, अत तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
रोजगार सेवक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज मिश्रा ने बताया कि बीते महीनों में तीन रोजगार सेवकों की आकस्मिक मृत्यु हो गई, लेकिन ईपीएफ खातों में गड़बड़ी के चलते उनके परिवारों को कोई लाभ नहीं मिला। अगर रोजगार सेवकों के ईपीएफ खातों में पैसा जमा किया गया होता तो मृत रोजगार सेवकों के परिवारों को मदद मिलती।
ग्राम रोजगार सेवकों के ईपीएफ के संबंध में जानकारी नहीं है। जांच करवाई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- कविता मीना, मुख्य विकास अधिकारी