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आखिर क्या छिपाने की कोशिश करते रहे पुलिस कर्मी

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बहराइच। मटेरा थाना क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में हुई युवक की मौत और अज्ञात में शव का अंतिम संस्कार कराने का मामला अभी पूरी तरीके से सुलझा नजर नहीं आ रहा है। अब भी सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या था जिसे छुपाने के लिए न तो युवक की शिनाख्त कराने का प्रयास किया और न ही बरामद बाइक को लिखा-पढ़ी में रखा। लगभग पांच-छह माह तक पीड़ित पत्नी दौड़ती रहीं। जब एसपी के पास पहुंचीं और अपनी दास्तां बयां की तब जाकर एसपी ने कार्रवाई करते हुए पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। अब भी उनके मन में यह टीस है कि काश! आखिरी बार पति का चेहरा देख पातीं। साथ ही चिंता भी है कि उनके दो बच्चों को कौन पालेगा। वह अब भी कह रही हैं कि पति की हत्या की गई है। विपक्षियों ने पुलिस कर्मियों को खेत बेचकर रुपये दिए हैं।
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नानपारा कोतवाली क्षेत्र के इमलिया गांव निवासी रीना देवी बीते साल 2021 के दिसंबर माह में अपने मायके आईं थी। उन्हें छोड़कर पति राधेश्याम अपनी ससुराल से घर जा रहे थे। रीना का आरोप है कि वह घर नहीं पहुंचे। कई दिन ढूंढने के बाद जब पति का कोई पता नहीं चला तो रिसिया थाने में गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज कराया। उन्होंने गांव के ही चार लोगों पर हत्या की आशंका जताते हुए रिसिया थाने में तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उच्चाधिकारियों के पास गईं तो तहरीर के अनुरूप चार लोगों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। रीना ने बताया कि लगभग छह माह बाद गांव के प्रधान से पता चला कि राधेश्याम जिस गाड़ी से अपने गांव जा रहे थे, वह मटेरा थाने में खड़ी है। जैसे ही यह जानकारी हुई तो वह फिर एसपी के पास पहुंचीं।
अच्छी बात यह रही कि उनकी मुलाकात सीधे एसपी से हुई। एसपी ने प्रकरण को सुना और जांच सीओ, पयागपुर राजीव सिसौदिया को सौंपी। सीओ ने जांच में तत्कालीन मटेरा थानाध्यक्ष राज कुमार यादव समेत पांच पुलिसकर्मियों की लापरवाही पाई और एसपी को रिपोर्ट सौंपी। एसपी ने सोमवार को पांचों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इस मामले को एसपी ने संज्ञान में लिया है और आगे भी कुछ पुलिसकर्मियों पर गाज गिर सकती है। एसपी केशव चौधरी ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आते ही मामले की जांच कराई गई। जांच में दोषी मिले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है। आगे भी जो दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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पुलिस के प्रेस नोट में बताया गया कि गाड़ी बिना लिखा-पढ़ी थाने में खड़ी रखी गई। मौत के बाद नियमानुसार अज्ञात में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अब सवाल उठता है कि जब पुलिस ने अंतिम संस्कार कराया तो उससे पहले युवक की पहचान कराने का प्रयास क्यों नहीं किया? थाने पर बाइक लावारिस हालत में खड़ी रही। आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि थाने में खड़ी गाड़ी के बारे में पूछताछ नहीं हुई।
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