बहराइच। जिले में परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत 35 हजार छात्र-छात्राओं का आधार कार्ड नहीं बन पाया है जिससे इन्हें यूनिफाॅर्म नहीं मिल पा रही। यूनिफाॅर्म खरीदने के लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजना के जरिए अभिभावकों के खाते में 1200 रुपए भेजे जाते हैं।
आधार कार्ड न बनने का कारण भी कई बताए जा रहे हैं। कुछ प्रमाण पत्र अनिवार्य कर देने से भी ऐसी स्थिति सामने आ रही है। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से जिले में 2803 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 533988 हैं। नौनिहालों की यूनिफाॅर्म, जूता-मोजा, स्कूल बैग, स्टेशनरी आदि की खरीदारी करने के लिए डीबीटी योजना के तहत सरकार की ओर से 1200 रुपए अभिभावकों के बैंक खाते में भेजे जाते हैं।
इसमें 35829 छात्र-छात्राएं ऐसे हैं, जिनका अभी तक आधार कार्ड नहीं बन पाया है। लेकिन शिक्षा विभाग का दावा है कि जिले के सभी ब्लॉकों के ब्लॉक संसाधनों पर बच्चों का आधार बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही आधार कार्ड बनवाने के लिए अभिभावकों को जागरूक भी किया जा रहा है।
इन वजहों से भी नहीं मिल रहा योजना का लाभ
बच्चों का आधार कार्ड न बन पाने के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं। इसमें अभिभावकों की सबसे बड़ी लापरवाही बताई जा रही है। अभिभावक अपने बच्चों का आधार बनवाने के लिए प्रयास नहीं कर रहे हैं। इसी तरह कुछ छात्रों का बायोमीट्रिक में अंगूठा न लगना भी एक कारणों में से एक है। इसके अलावा आधार कार्ड बनाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। तमाम छात्रों का न तो जन्म प्रमाण पत्र बना है और न ही निवास प्रमाण पत्र है।
सभी ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर बच्चों का निशुल्क आधार कार्ड बनाया जा रहा है। इसके साथ ही सभी अभिभावकों को आधार कार्ड बनवाने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।
वीरेंद्रनाथ द्विवेदी, खंड शिक्षाधिकारी/प्रभारी बीएसए