बहराइच। जिले की सरकारी बैंकों में गुरुवार को भी कर्मचारियों की हड़ताल से कामकाज ठप रहा। उपभोक्ता बैंक से बैरंग लौटे। न तो रुपये जमा हो सके न ही पैसे की निकासी हो सकी। एटीएम भी दगा दे गए। दूसरे दिन भी लगभग 45 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ। सबसे ज्यादा असर उद्योग धंधों पर पड़ा। यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के जिला संयोजक कृष्णकांत ने दावा किया कि दूसरे दिन की हड़ताल के चलते बहराइच व श्रावस्ती को मिलाकर लगभग 80 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है। अकेले बहराइच में ही 45 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि अगर मांगें न मानी गईं तो आंदोलन उग्र होगा। दूसरे दिन भी हड़ताल के चलते बैंकों में ताले लटके रहे। यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर जिला संयोजक कृष्णकांत अवस्थी की अगुवाई में सभी बैंकों के प्रबंधक और कर्मचारी सुबह 11 बजे जेल रोड स्थित इलाहाबाद जोनल कार्यालय परिसर में एकत्र हुए। दूसरे दिन भी सभी ने नारेबाजी करते हुए सात सूत्रीय मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए फोरम के वरिष्ठ पदाधिकारी अभिलाषित कौशल, नमित शर्मा व अंशुमनि ने कहा कि जब तक सात सूत्रीय मांगें नहीं मानी जाएंगी, आंदोलन थमने वाला नहीं। पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक अमर सिंह, एबी सक्सेना व यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि लंबित मांगों के साथ सभी नई मांगों पर सरकार को विचार करना होगा। अन्यथा वृहद आंदोलन शुरू किया जाएगा। जिला मंत्री अफरोज आलम लारी ने कहा कि संगठन की सभी मांगें नीतिगत हैं। एसोसिएशन के चेयरमैन की हठधर्मिता से अब काम चलने वाला नहीं। सभा में यज्ञराम यादव, किशोर कुमार, भरतलाल, सतगुरु प्रसाद, मोहम्मद इसरार, अमरनाथ सिन्हा, अशोक कुमार सिंह, शिवाजी जायसवाल, लालजी, महेश, किशन, पंकज, गिरिजा दयाल, विजय, खूब सिंह, जमील अहमद, दिलीप सिंह, राजेंद्र कुमार मौर्य आदि मौजूद रहे।
बैंक कर्मियों की मांगें एक नजर में-
-पहले से लंबित सभी मांगों का निस्तारण किया जाए
-खंडेलवाल कमेटी की संस्तुति रद की जाए
-बैंकिंग बिल वापस लिया जाए
-बैंकों में आउट पोस्टिंग व्यवस्था बंद हो
-ग्रामीण शाखाओं की बंदी रोकी जाए
-बैकिंग क्षेत्र का कथित सुधार कार्यक्रम बंद किया जाए
-कार्मिक मामलों में एकतरफा हस्तक्षेप बंद हो