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Bahraich News: संजय सेतु पर लगा आठ किमी लंबा जाम

Sun, 23 Jun 2024 01:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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बहराइच-लखनऊ मार्ग पर पुल के बगल में लगा वाहनों का जाम। स्रोत ग्रामीण।
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चार घंटे तक फंसे रहे वाह, पुल पर एक साथ तीन वाहनों के खराब होने से हुई समस्या, कई एंबुलेंस भी फंसी रहीं
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खराब वाहनों को हटवा कर पुलिस ने खुलवाया जाम

संवाद न्यूज एजेंसी

जरवलरोड (बहराइच)। बहराइच-लखनऊ मार्ग स्थित संजय सेतु पर शनिवार की सुबह एक साथ तीन वाहनों के खराब होने से भीषण जाम लगा। लगभग चार घंटे तक हजारो छोटे-बड़े वाहन जाम में फंसे रहे। जाम के चलते पुल के दोनों तरफ लगभग आठ किलोमीटर तक सिर्फ वाहन ही वाहन नजर आए। सूचना पर पहुंची जरवलरोड पुलिस ने कड़ी मशक्क्त कर खराब वाहनों को पुल से हटवा कर जाम खुलवाया। जाम में कई एंबुलेंस भी फंसी रहीं।

जरवलरोड थाना क्षेत्र में बहराइच-लखनऊ मार्ग पर घाघरा नदी पर बने संजय सेतु पर सुबह लगभग 8.30 बजे एक गैस सिलेंडर लदा ट्रक खराब हो गया। वहीं इस दौरान एक ट्रांसपोर्ट वाहन व एक ट्रक भी खराब हो गया। जिससे संयज सेतु पर वाहनों का आवागमन थम गया। देखते ही देखते पुल और पुल के दोनों तरफ वाहनों की लंबी लाइन लग गई। सूचना पर पहुंची जरवलरोड पुलिस ने जाम खुलवाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन कुछ ही देर में लगभग आठ किमी लंबा जाम लग गया। जाम में विभिन्न जिलों के हजारों छोटे-बड़े वाहन फंस गए, जिसमें कई एंबुलेंस भी शामिल रहीं। इस दौरान लगभग चार घंटे तक भीषण जाम लगा रहा और वाहनों में फंसे लोग परेशान रहे। कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 12:30 पर पुलिस ने खराब वाहनों को जेसीबी से हटवा कर जाम खुलवाया। जिसके बाद वाहन चालकों ने राहत की सांस ली। जाम के चलते सबसे ज्यादा छोटे बच्चे परेशान रहे।
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गंभीर हुई जाम की समस्या, आए दिन होती है समस्या
जरवलरोड थाना क्षेत्र स्थित संजय सेतु का प्रयोग बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा समेत कई अन्य जिलों व पड़ोसी देश नेपाल के वाहन चालक करते हैं। विभिन्न जिलों को राजधानी से जोड़ने के लिए यह यह इकलौता पुल है। लेकिन अब इस पर जाम की समस्या भीषण हो गई है और आए दिन जाम लगता है। एक ओर जहां जाम के चलते कई मरीजों की जान पर बन आती है, तो वहीं सहालग के मौसम में कई दूल्हे और बराती भी फंसते हैं। जिसके चलते लोग अब दूसरे पुल की मांग कर रहे हैं। बताते चलें कि घाघरा नदी पर वर्ष 1981 में संजय सेतु की आधारशिला तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने रखी थी और वर्ष 1984 में आवागमन शुरू हुआ था। 40 वर्ष पुराने इस पुल पर वाहनों का दबाव लगभग 50 गुना बढ़ गया है।
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