मोतीपुर (बहराइच)। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में हाथियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसको लेकर अब छह सदस्यीय टीम से गजराज की गणना शुरू कराई गई है। 53 थर्मोस्टेट कैमरे लगा दिए गए हैं। हाथियों की सटीक प्रोफाइलिंग की जा रही है। पहली बार गोबर के माध्यम से हाथियों की गिनती या उनकी जनसंख्या पता लगाने का अनोखा प्रयास किया जा रहा है।
वैसे तो हाथियों की गिनती काफी लंबे समय से होती चली आ रही है। लेकिन इस बार गणना में त्रिस्तरीय पद्धति अपनाई गई है। अंतर्राष्ट्रीय पद्धति में गोबर के माध्यम से डीएनए का पता लगाकर हाथी का डेटाबेस तैयार होगा और प्रत्येक हाथी का एक यूनिक कोड तैयार किया जाएगा।
जिस प्रकार भारत में बाघों की गिनती थर्मोस्टेट कैमरों के माध्यम से होती है उसी प्रकार हार्थियों की गिनती के लिए भी थर्मोस्टेट कैमरे लगा दिए गए हैं। यह कैमरे उन जगहों पर लगाए गए हैं, जहां से हाथियों की आवाजाही सबसे ज्यादा या निरंतर होती रहती है।
डेढ़ महीने में पता की जाएगी हाथियों की संख्या
प्रोजेक्ट एलीफेंट का यह कार्यक्रम भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून और पर्यावरण मंत्रालय के निर्देशन में हाथी बाहुल्य इलाकों में ही शुरू किया गया है। डेढ़ महीने तक चलने वाला यह कार्यक्रम हाथी की प्रोफाइल पूरी होने के बाद ही बंद किया जाएगा। इसके बाद इसकी पूरी रिपोर्ट पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को भेज दी जाएगी, जिससे बाद में देश में हाथियों की सही संख्या पता चल सकेगा।
टीम का हो रहा सहयोग
डीएफओ आकाशदीप बधावन ने बताया कि छह सदस्य टीम में सभी भारतीय वन्यजीव संस्थान के रिसर्च स्कॉलर हैं। यह वैज्ञानिक पद्धतियों का इस्तेमाल करते हुए इस कार्य को कर रहे हैं। उनकी सुरक्षा और सहयोग के लिए वन विभाग की टीम लगाई गई है।
जंगल में लगाए गए थर्मोस्टेट कैमरे
डीएफओ ने बताया कि फिलहाल जंगल के विभिन्न हाथी रोड पर थर्मोस्टेट कैमरे लगा दिए गए हैं। इस प्रोजेक्ट में हाथी की गणना के दौरान कई बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा या देखा जाएगा हाथी के आने-जाने का रास्ता क्या है। जैसे टाइगर को धारियों से पहचाना जा सकता है वैसे ही हाथी को दूसरे हाथी से अलग करके देखा जा सकता है।
उसका मूल्यांकन करने के लिए बहुत सी चीजें होती हैं, जैसे उसके दांत, बाल, बदन पर कोई दाग और पूछ की लंबाई अलग-अलग हाथी में अलग-अलग होती है। वैसे तो थर्मोस्टेट कैमरे में फोटो लेने से पता चल जाता है। डीएफओ ने बताया कि गोबर के डीएनए परीक्षण से यह बात साफ हो जाती है कि वास्तव में कितने हाथी इस समय जंगल में विचरण कर रहे हैं।