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Bahraich News: बिजली-पानी को तरस गई 15 लाख आबादी

Sun, 19 Mar 2023 11:25 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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बहराइच। बिजली कर्मियों की हड़ताल के पांचवे और अंतिम दिन ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या और भी गहरा गई है। अभी हड़ताली कर्मचारियों की पूरी तरह से वापसी न होने के चलते जिले की पांच तहसीलों में नौ सौ से अधिक गांवों में अभी भी ब्लैक आउट जैसे हालात बने हुए है। सभी गांवों में तीन दिनों से अंधेरा पसरा है। उपभोक्ताओं के इन्वर्टर, मोबाइल समेत अन्य विद्युत के उपकरण फेल हो चुके हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 15 लाख की आबादी के सामने बूंद-बूंद पानी का संकट पैदा हो गया है। हालात से निपटने के लिए जिला प्रशासन की ओर से उपकेंद्रों पर तैनात किए नोडल अधिकारी, लेखपाल समेत अन्य कर्मियों का मोबाइल बंद हो गया है। पूरा प्रशासनिक अमला बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हांफता नजर आ रहा है। व्यापारियों के उद्योग धंधे व कारखाने बंद पड़े हुए हैं। सीएचसी व पीएचसी में रखे वैक्सीन आदि खराब होने के कगार पर पहुंच गए हैं। कुछ इलाकों में तो लोगों ने किराए का जनरेटर मंगाकर पेयजल इन्वर्टर व मोबाइल की चार्जिंग तो कर ली है। लेकिन कुछ स्थानों पर किराए के जनरेटर लेने के लिए भी मारामारी मची रही। उधर शहर में बिजली कर्मचारियों के पांच दिन तक चले हड़ताल का कोई खासा प्रभाव नहीं दिखाई दिया। शहर की बिजली व्यवस्था सामान्य तरीके से संचालित होती रही।

विकास खंड रिसिया के 74 ग्राम पंचायतों के सौ मजरों समेत नगर पंचातत के सभी 11 वार्डो की विद्युत व्यवस्था 24 घंटे से प्रभावित है। सभी विद्युत उपकरण जवाब दे चुकें है। क्षेत्र की करीब एक लाख से अधिक की आबादी बूंद-बूंद पानी को तरसने को विवश है।
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नानपारा में भी बिजली आपूर्ति अभी पटरी पर नहीं लौटी है। बीते शुक्रवार की देर ढाई बजे स्टेशनरोड स्थित जुबलीगंज मोहल्ले की ठप हुई बिजली आपूर्ति रविवार को भी चालू नहीं हो सकी है। व्यवसाईयों का व्यापार चौपट हो गया है। कुछ लोगों अपने निजी व किराए के जनरेटर के सहारे अपनी दिनचर्या का कार्य पूरा किया। लेकिन इसके बावजूद एक लाख से अधिक की आबादी अभी भी बिजली पानी को लेकर परेशान है।

पयागपुर तहसील क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति अभी तक पटरी पर नहीं लौटी है। 30 घंटे से अधिक का समय हो रहा है। यहां की आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। उपभोक्ता बूंद-बूंद पानी को लेकर तरस रहें हैं। यहां भी कुछ उपभोक्ताओं ने किराए पर जनरेटर मंगाकर जलापर्ति की व्यवस्था तो कर ली है। हालांकि यहां हड़ताली कर्मचारियों के वापसी शुरू हो गई है। अधिकारियों की माने तो देर शाम तक व्यवस्था पटरी लौट आएगी।

महसी तहसील की भी विद्युत आपूर्ति 48 घंटे से ठप है। क्षेत्र के पांच दर्जन से अधिक गांवों में दो दिनों से अंधेरा पसरा हुआ है। गांवों की करीब दो लाख की आबादी बिजली पानी को लेकर परेशान है।

सीमावर्ती क्षेत्र रूपईडीहा की चरमराई बिजली व्यवस्था की स्थित अभी भी जस की तस बनीं हुई है। सहाबा उपकेंद्र से उपभोक्ताओं को मिलने वाली आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। बीते शुक्रवार दोपहर बाद क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों की बिजली आपूर्ति अभी भी ठप है। करीब तीन लाख से अधिक की आबादी बदहाल विद्युत व्यवस्था की चपेट में हैं। यहां किराए के जनरेटर के लिए भी मारामारी मची हुई है।

चित्तौरा विकास खंड की विद्युत आपूर्ति शहर के बख्शीपुरा उपकेंद्र की की जाती है। उपकेंद्र में आई तकनीकी खराबी के बाद यहां के आधा दर्जन गांवों सप्लाई बंद है। करीब 50 हजार से अधिक की आबादी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।

जरवलरोड, कैसरगंज, मटेरा, हुजूरपुर, तेजवापुर, फखरपुर के मरौचा समेत अन्य ग्रामीण इलाकों की भी व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं लौटी है। सभी गावों की सात लाख से अधिक की आबादी के सामने दो दिनों से बिजली पानी की समस्या खड़ी है। इसके अलावा अगैया के एसएसबी मुख्यालय की भी बिजली बंद है। एसएसबी के अवर अभियंता नरेंद्र ने बताया कि बाधित विद्युत व्यवस्था से सरकारी कार्य प्रभावित है। जवानों के माध्यम से व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश की गई थी। लेकिन व्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है।
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