बागपत। यमुना नदी अब जीवनदायिनी नहीं रही। पानी में ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जो आठ की जगह चार मिलीग्राम पर पहुंच गया है। पानी को पीने से लोग बीमारियों की चपेट में आएंगे और यमुना में जलीय जीव भी मरने लगे हैं।
यमुना नदी का पानी कुछ समय पहले तक लोग सीधे पीने के लिए इस्तेमाल करते थे। मगर अब यमुना किनारे बसे गांवों के नालों का पानी इसमें छोड़ा जा रहा है तो उद्योगों का दूषित पानी भी यमुना में पहुंच रहा है। जिससे यमुना के पानी में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और उस पानी को सीधे पीने से लोगों के लिए खतरा है। इस प्रदूषण के कारण ही यमुना नदी में मछलियां मरने लगी हैं। इससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ रही है।
जांच करने पर प्रदूषण का पता चला
प्रदूषण नियंत्रण विभाग हर महीने यमुना के पानी की जांच कराता है। जनवरी महीने में निवाड़ा यमुना पुल के पास से पानी का नमूना लेकर जांच कराई गई तो उसमें ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम मिली। ऑक्सीजन की मात्रा आठ मिलीग्राम होनी चाहिए, लेकिन वह चार मिलीग्राम तक पहुंच गई है। अगर ऑक्सीजन की मात्रा इससे नीचे पहुंचती है तो पानी जहरीला हो जाएगा।
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यमुना किनारे मरी मिलीं मछलियां
यमुना नदी में मछलियों को दाना डालने के लिए प्रतिदिन जाते हैं, लेकिन यमुना का पानी दूषित हो गया है। जिससे मछलियां मर रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अफसरों को यमुना नदी की सफाई कराने और उसमें दूषित पानी डालने से रोकने पर काम करना चाहिए। - मनीष गर्ग
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प्रदूषण को कम करने पर काम किया जाए
यमुना नदी से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है, जहां त्योहारों पर श्रद्धालु पूजा अर्चना करते हैं। यमुना किनारे कूड़ा व पानी दूषित देखकर उसमें स्नान किए बिना ही वापस लौटना पड़ता है। प्रदूषण रोकने के लिए सरकार को कार्य करना चाहिए। - नीरज शास्त्री
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वर्जन-
यमुना नदी के पानी की जांच कराई गई थी। जिसमें ऑक्सीजन चार मिलीग्राम मिली है। यमुना का पानी पीने लायक नहीं है, लेकिन स्नान करने में अभी कोई परेशानी नहीं है। यमुना में मछलियों के मरने के मामले की जांच कराई जाएगी। - प्रखर कटियार, सहायक अभियंता, प्रदूषण विभाग मेरठ।