जांच के दौरान पुलिस को योगेेंद्र उर्फ बूचा के जिंदा होने की जानकारी मिली, लेकिन वह बरामद नहीं हो सका। पुलिस ने घर जाकर सख्ती बरती तो योगेंद्र खुद ही न्यायालय में पहुंच गया। इसका पता चलने पर पुलिस ने योगेंद्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पूरे मामले का खुलासा हो गया।
योगेंद्र उर्फ बूचा ने बताया कि वेदप्रकाश के परिवार से चल रही रंजिश का बदला लेने और उन्हें फंसाने के लिए हत्या के झूठे मुकदमे की साजिश रची गई, जिसके बाद से वह दिल्ली के रोहिणी में रह रहा था।
वेदप्रकाश के परिवार से 2018 में हुआ था झगड़ा, तब हुआ गायब
पुलिस के अनुसार वर्ष 2018 में वेदप्रकाश के परिवार के साथ योगेंद्र के परिवार से झगड़ा हुआ था। जिसमें वेदप्रकाश की तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया था और उसमें योगेंद्र उर्फ बूचा भी आरोपी था। पुलिस का कहना है कि तभी से योगेंद्र गांव से गायब हो गया था और वह दिल्ली के रोहिणी में रहने लगा था।
पुलिस ने उस मुकदमे में कुर्की के आदेश भी कराए और कुर्की भी कर ली। उसके बाद भी वह वापस नहीं लौटा। उस मामले में किसी भी तरह से समझौता नहीं होने पर वेदप्रकाश पक्ष के खिलाफ अप्रैल 2023 में हत्या का मुकदमा कराया गया। अब पुलिस को कुछ अहम जानकारियां मिलने पर उसको वापस बुलाने के लिए परिवार पर दबाव बनाया गया तो वह लौटकर आया।
वर्जन
झूठा मुकदमा दर्ज कराने वालों पर कार्रवाई होगी
एएसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इब्राहिमपुर गांवड़ी गांव के व्यक्ति की हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसे जिंदा बरामद कर लिया गया है। रंजिश में विपक्षी को फंसाने के लिए हत्या की फर्जी साजिश रची गई थी। इस मामले में पुलिस को गुमराह करने और फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।