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ट्रेनें बंद हुईं तो रोजगार भी हाथ से गया

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बड़ौत का रेलवे स्टेशन - फोटो : BAGHPAT
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बागपत/बड़ौत। अलावलपुर गांव के ललित कोरोना काल से पहले दिल्ली की एक निजी कंपनी में 12 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी करते थे। वह ट्रेन से ड्यूटी जाते थे और ट्रेन से आते थे। ट्रेन में केवल 20 रुपये किराया था। लॉकडाउन के बाद कंपनी में काम शुरू हुआ, लेकिन ट्रेन नहीं चलने से कुछ दिन बस से गए। बस में कई गुणा ज्यादा किराया लगा तो नौकरी छोड़नी पड़ गई।
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इस तरह से ट्रेन बंद होने के कारण नौकरी छोड़ने वाले ललित अकेले नहीं हैं। बल्कि इस तरह के काफी युवा हैं, जिन्हें निजी कंपनियों की नौकरी ट्रेन बंद होने के कारण ही छोड़नी पड़ी। कोरोना काल के बाद तीन ट्रेनें शुरू भी हुईं तो उनका समय नौकरी पर जाने और वहां से आने के समय के अनुरूप नहीं था। सूजरा गांव के आकाश भी गुड़गांव एक फैक्टरी में नौकरी करते थे। वह ट्रेन में जाते थे, लेकिन ट्रेन बंद होने के बाद नौकरी छोड़ दी। बस से रोजाना घर से नौकरी पर पहुंच नहीं सकते थे। वहां कमरा लेकर रहने और खाने की व्यवस्था कर सके तो उतने पैसे नहीं मिलते थे।
यहां कम पैसों में नौकरी करनी पड़ रही
बड़का रोड के रहने वाले तरुण ने बताया कि वह कोरोना काल से पहले नोएडा में एक कंपनी में दस हजार की नौकरी करता था। वह बड़ौत से रोजाना ट्रेन में दिल्ली जाता था और वहां से मेट्रो से नोएडा पहुंच जाता था। इससे उसका रोजाना का करीब 60 रुपये खर्च आता था, लेकिन ट्रेन बंद होने के बाद समय पर पहुंचना मुश्किल हो गया और बस से खर्च भी 150 रुपये तक हो गया। इसलिए नौकरी छोड़कर कम पैसे में बड़ौत ही काम करना पड़ रहा है।
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अब केवल 11 हजार यात्री रह गए
दिल्ली-शामली वाया बागपत रेलवे ट्रैक पर कोरोना से पहले 13 ट्रेनें चलती थीं। उस समय करीब 30 हजार यात्री ट्रेनों में बागपत के स्टेशनों से सफर करते थे। अब केवल तीन ट्रेनें चल रही हैं और करीब 11 हजार यात्री ट्रेनों में सफर करते हैं। यह उम्मीद जताई जा रही है कि अगर ट्रेनें बढ़ जाती हैं तो यात्री भी दोबारा से बढ़ जाएंगे। ड्यूटी जाने व आने के समय ट्रेन नहीं चलने के कारण भी परेशानी बढ़ रही है।
ट्रेन और बस के किराए में है काफी फर्क
बागपत से ट्रेनों और बसों में दिल्ली तक जाने के लिए किराए की बात करें तो 50 से 60 रुपये का अंतर है। ट्रेन की जगह बस में जाने पर ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं। जिले के मध्य में पड़ने वाले बड़ौत स्टेशन से दिल्ली का किराया केवल 15 से 20 रुपये है, जबकि बस में 70 से 80 रुपये तक देने पड़ते हैं।
कोट...
यात्रियों को परेशानी के साथ राजस्व पर असर
- कोरोना काल में जितनी ट्रेनें बंद की गई थीं, वे अभी तक संचालित नहीं हो सकीं हैं। उम्मीद है कि अगस्त में धीरे-धीरे सभी ट्रेनों का संचालन हो जाए। ट्रेनों की कमी के कारण जहां यात्रियों को परेशानी हो रही है, वहीं राजस्व पर भी असर पड़ रहा है। - सुधीर शर्मा, अधीक्षक बड़ौत रेलवे स्टेशन
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