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गेहूं और धान का रकबा घटा, किसानों का तिलहन की खेती के लिए रूझान बढ़ा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बागपत। जिले में पिछले दो साल में गेहूं और धान का रकबा घट गया है, जबकि तिलहन का रकबा बढ़ा है। इस दौरान गेहूं और धान के रकबे में चार सौ हेक्टेअर की कमी आई है। शासन स्तर पर जिले में तिलहन का 3371 हेक्टेअर, धान का 4807 हेक्टेअर और गेहूं का 54427 हेक्टेअर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिले में मुख्य रूप से गन्ने की पैदावार की जाती है। इसके अतिरिक्त यहां गेहूं, धान, तिलहन और दलहन की पैदावार की जाती है। पिछले दो साल में जिले में लोगों का रुझान तिलहन की ओर बढ़ा है। दो साल में जिले में तिलहन के रकबे में लगभग चार सौ हेक्टेअर की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि गेहूं के रकबे में चार सौ हेक्टेअर में कमी आई है। धान का रकबा भी दो साल में चार सौ हेक्टेअर कम हुआ है। शासन स्तर से वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिले में धान का लक्ष्य 4807 हेक्टेअर और गेहूं का लक्ष्य 54731 हेक्टेअर निर्धारित किया है, जबकि तिलहनी फसल का रकबा पिछले साल के मुकाबले 275 हेक्टेअर का लक्ष्य निर्धारित किया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो सालों में किसानों का तिलहनी खेती की ओर से रुझान बढ़ने से गेहूं और धान का रकबा घट गया है।
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जिले में फसलों का रकबा (हेक्टेअर में)
वर्ष गेहूं धान तिलहन
2020-21 55437 5443 2716
2021-22 55014 4877 3102
कम लागत में मिलता है अधिक मुनाफा
सरसों की खेती में ज्यादा खाद पानी की जरूरत नहीं पड़ती है। सरसों की फसल से कम लागत और मेहनत में अधिक मुनाफा मिलता है।-सुनील शर्मा, अमीनगर सराय
अवारा पशु सरसों की फसल में कम नुकसान करते हैं और कम लागत में अच्छी पैदावार होने के कारण अन्य फसल के मुकाबले अधिक मुनाफा होता है।-करण सिंह उर्फ पिंकी, टटीरी
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वर्जन
सरसों की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देती है। इसके अतिरिक्त फसल में आवारा पशु भी कम नुकसान करते हैं। जिस कारण जिले में सरसों की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है- प्रशांत कुमार, उप कृषि निदेशक बागपत
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