बागपत। राम मंदिर निर्माण के लिए हर आंदोलन में बागपत की तरफ से अग्रिम पंक्ति में खड़े रहने वाले विपिन रुहेला वर्ष 1992 में कारसेवा होने तक पांच बार अयोध्या गए। वह ढांचा विध्वंस के प्रत्यक्षदर्शी भी हैं। कारसेवा के बाद कहा था कि मंदिर के निर्माण के बाद ही अयोध्या आएंगे। अब सपना पूरा होने पर रामलला के दर्शन करने परिवार के साथ जाने की तैयारी में हैं।
शहर की पुरानी तहसील मोहल्ला निवासी विपिन रुहेला ने बताया कि संतों के आह्वान पर शहर में राम मंदिर निर्माण के आंदोलन का बिगुल बज गया। हिंदू संगठनों से जुड़ाव होने के कारण वह भी राम मंदिर आंदोलन में शामिल हो गए। उन्होंने बताया कि जब भी आवाज उठी, बागपत से रामभक्तों की टोली ने अयोध्या के लिए कूच कर दिया। वह शहर के रामभक्तों के साथ मिलकर 1991 तक तीन बार अयोध्या गये। इसके बाद एक बार राम मंदिर के आंदोलन में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंचे, लेकिन विवादित ढांचे के पास पहुंचने से पहले ही पुलिस के लाठीचार्ज और गोलीकांड होने से वापस लौटना पड़ा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में अयोध्या पहुंचे और उनके सामने ही विवादित ढांचा विध्वंस हुआ था। उन्होंने बताया कि ढांचा विध्वंस होने के बाद अयोध्या नहीं गए, लेकिन अब उनके जीवन का लक्ष्य पूरा हो गया। पिछले कई महीनों से वह अस्वस्थ चल रहे है। स्वास्थ्य में सुधार होते ही रामलला के दर्शन करने जाएंगे।
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नेताओं को पुलिस ने पकड़ लिया, मैं छात्र होने के कारण बच गया
विपिन रुहेला ने बताया कि अयोध्या में ढांचा विध्वंस होने के कई दिन बाद ट्रेन में बैठकर वापस लौटे। बागपत वापस पहुंचे तो बड़े नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार का मुजफ्फरनगर जेल भेज दिया। लेकिन वह छात्र होने के कारण बच गए। वह कहते है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होना हर हिंदू का सपना था और वह सपना अब पूरा हो गया है। 22 जनवरी को राम लला विराजमान प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम देश के लिए सबसे बड़ा उत्सव होगा।