बागपत के अमीनगर सराय कस्बे का मनसा देवी मंदिर काफी प्राचीन है। लोगों की मान्यता है कि मंदिर के वट वृक्ष पर कलावा बांधने से मन्नत पूरी हो जाती है। नवरात्र में दूर-दराज से श्रद्धालु माता की पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में पहुंचते हैं। नवरात्र में मंदिर में विश्व शांति के लिए हवन का आयोजन किया जाता है और नवमी को भगवती पर छत्र चढ़ाया जाता है।
कस्बे के मनसा देवी मंदिर लगभग सात दशक पुराना है। इस मंदिर की क्षेत्र में अलग पहचान है। सिद्धपीठ होने के कारण नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।
लोगों का कहना है कि नौचंदी मेले के बाद कस्बे के मंदिर में दूसरा सबसे बड़ा मेला लगाता था। लोगोंं की मान्यता है कि मंदिर के वट वृक्ष पर कलावा बांधकर जो भी मन्नत मांगी जाती है वह पूरी हो जाती है। मन्नत पूरी होने पर लोग कलावा खोलकर मंदिर में भंडारा कर प्रसाद वितरित करते हैं।
20 वर्ष सनातन धर्म ने कराया था मंदिर का जीर्णोद्वार
20 वर्ष पूर्व किसी व्यक्ति ने माता की मूर्ति को खंडित कर दिया था। सनातन सेवा समिति ने जनसहयोग से मंदिर का पुर्ननिर्माण कराया था।
गोशाला में 200 गायों का किया जाता है पालन
मंदिर के प्रांगण विशाल गोशाला है। इस गोशाला में 200 गायों का पालन किया जाता है। मंदिर समिति की ओर से गायों के लिए राशन की व्यवस्था कराई जाती है।
विश्व शांति के लिए कराया जाता है यज्ञ
मंदिर के पुजारी विश्वबंधु वशिष्ठ का कहना है कि मंदिर में भव्य यज्ञशाला है। यज्ञशाला में माता के नवरात्र और श्रावण मास में विश्व शांति के विशाल यज्ञ किया जाता है। श्रद्धालु यज्ञशाला की परिक्रमा करते हैं। मंदिर में चैत्र और शरदीय नवरात्र में माता के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा कराई जाती है। नवमी पर माता को छत्र चढ़ाकर कस्बे में शोभायात्रा निकाली जाती है।