बागपत। पाबला गांव में तालाब के किनारे बने मकानों को तोड़ने पहुंची तहसील की टीम के साथ ग्रामीण भिड़ गए। जहां उनके बीच काफी नोकझोंक हुई तो ग्रामीण जेसीबी के आगे खड़े हो गए। इस तरह वहां हंगामा बढ़ता देखकर तहसीलदार ने ग्रामीणों को खुद ही अतिक्रमण हटाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।
पाबला गांव में तालाब के किनारे बने करीब 24 मकानों को तोड़ने के लिए तहसील से कानूनगो सतपाल सिंह, लेखपाल सुंदरलाल अन्य कर्मियों व पुलिस के साथ जेसीबी लेकर पहुंचे। यह कहा गया कि उन मकानों का काफी हिस्सा तालाब की जमीन पर अतिक्रमण करके बनाया गया है। वहां टीम ने जेसीबी चलवाकर दीवारों को तोड़ना शुरू कर दिया। जिसका पता चलते ही वहां वेदराम, गिरिराज, सलेकचंद, कैलाश, राजकुमार, चंद्रपाल समेत अन्य ग्रामीण पहुंच गए।
वहां ग्रामीणों ने हंगामा किया और उनकी तहसील की टीम के साथ नोकझोंक होने लगी। तहसील कर्मी जेसीबी को चलवाने लगे तो ग्रामीणों ने जेसीबी के आगे खड़े होकर उसे रोक दिया। वहां हंगामा होने पर तसीलदार अजय कुमार भी पहुंच गए तो उनके सामने भी ग्रामीणों ने काफी हंगामा किया। उसके बाद तहसीलदार ने सभी को एक सप्ताह में खुद ही उन सभी निर्माण को खुद तुड़वाने का समय दिया जो अतिक्रमण करके किया गया है। इसके बाद ही मामला शांत हुआ।
- तालाब की जमीन कब्जाकर करनी शुरू कर दी खेती
तहसीलदार अजय कुमार ने बताया कि पाबला में कुछ लोगों ने तालाब की जमीन पर कब्जा करके खेती भी शुरू कर दी। उनके वहां खेत थे, जिन्होंने काफी जमीन उनमें तालाब की मिला ली। उनकी भी पैमाइश कराई गई है और उसको भी कब्जामुक्त कराया जाएगा।
- ग्रामीण बोले काफी साल पहले बने मकान, अब कैसे हुआ कब्जा
वहां ग्रामीण चंद्रपाल, वेदराम, कैलाश आदि ने आरोप लगाया कि उनके मकान पचास साल पुराने हैं। इतने साल में कभी अतिक्रमण की बात नहीं कही गई तो अब अतिक्रमण कैसे हो सकता है। इस तरह ग्रामीणों ने उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। इस मामले में ग्रामीणों ने सोमवार को कलक्ट्रेट में धरना देने की बात कही है।
- पाबला में अटल भूजल योजना के तहत तालाब की खोदाई कराई जा रही है। तालाब की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा करके निर्माण किया हुआ है। उस निर्माण को हटवाने के लिए टीम गई थी। जहां लोगों ने कुछ समय मांगा था तो उनको सात दिन का समय दिया गया है। -अभिलाष त्रिपाठी, एसडीएम