बागपत। भाजपा में अभी तक बड़े चुनावों में गुटबाजी और भितरघात दिखाई देता था। मगर गन्ना व चीनी मिल समितियों के चुनाव के दौरान भी इस बार खूब गुटबाजी और भितरघात दिखाई दिया।
अपनी ही पार्टी के घोषित प्रत्याशियों को हराने के लिए नेताओं ने जोर लगा दिया। जिससे दो जगह प्रत्याशी पहले ही हार गए तो एक जगह अपनी मजबूत पकड़ के कारण नैया पार लगाने में कामयाब रहे।
भाजपा ने बागपत गन्ना समिति के लिए प्रदीप ठाकुर और चीनी मिल समिति के लिए कृष्णपाल सिंह को पार्टी का प्रत्याशी बनाया था। वहीं मलकपुर गन्ना समिति के लिए अनीता खोखर व रमाला चीनी मिल समिति के लिए संजीव जिवानी को प्रत्याशी बनाया था।
इनको प्रत्याशी घोषित करते ही केवल बागपत चीनी मिल समिति को छोड़कर अन्य सभी जगह गुटबाजी दिखनी शुरू हो गई और भितरघात के लिए भाजपा के नेता ही सक्रिय हो गए।
इसका ही नतीजा रहा कि मलकपुर गन्ना समिति में प्रत्याशी अनीता खोखर डायरेक्टर तक भी नहीं पहुंच सकीं। इस तरह ही रमाला चीनी मिल समिति के चुनाव में संजीव जिवानी भी डायरेक्टर नहीं बन सके। इस तरह वहां भाजपा की चुनौती खत्म होने पर भाजपा को अन्य प्रत्याशियों के साथ खड़ा होना पड़ा।
सबसे ज्यादा खींचतान बागपत गन्ना समिति के चुनाव में देखने को मिली। जहां कई बड़े नेताओं ने पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप ठाकुर की खुलकर खिलाफत की। यह नेता अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ डेलीगेट व डायरेक्टरों के घर तक पहुंचे। उनकी कई लोगों के पास रिकाॅर्डिंग भी मौजूद होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि उनको अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया।
इसके बावजूद किसानों में मजबूत पकड़ के कारण वह भितरघात का शिकार होने से बच गए और निर्विरोध जीत दर्ज की। (संवाद)