उपभोक्ताओं की इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो लखनऊ तक मामला गूंजा और निदेशक वितरण कमलेश बहादुर सिंह ने एमडी, अधीक्षण अभियंता को पत्र भेजकर बिना उपभोक्ता की सहमति के ट्रांसफार्मर के नाम पर वसूली करने पर रोक लगा दी है।
तीन डिवीजनों में लिया जा रहा था पैसा, एक में नहीं
जिले में भी बागपत की प्रथम और द्वितीय डिवीजन, बड़ौत डिवीजन प्रथम में ही पैसा लिया जा रहा था। बड़ौत द्वितीय डिवीजन में ट्रांसफार्मर के नाम पर कोई पैसा नहीं लिया जा रहा था। जिले में तीन सालों में 110 उपभोक्ताओं से करीब 70 लाख रुपये से अधिक की धनराशि वसूली गई। उससे पहले के सालों की रकम तो और भी अधिक बैठती है।
सूचना मांगी तो हुआ खुलासा
प्रशांत शर्मा एडवोकेट ने सूचना के अधिकार में मांगी गई सूचना के जवाब में अधिशासी अभियंताओं ने बताया कि 50 किलोवॉट तक के औद्योगिक कनेक्शनों के संयोजनों के प्राक्क्लन में ट्रांसफार्मर 25केवीए अथवा 63 केवीएए होने की दशा में इसकी धनराशि नियमानुसार विभाग द्वारा वहन की जाएगी। ना कि उपभोक्ताओं से वसूली जाएगी।
पहले यह आदेश स्पष्ट नहीं था, इसको लेकर खुद प्रबंध निदेशक मेरठ ने लखनऊ शक्ति भवन से मार्गदर्शन मांगा था। अब निदेशक वितरण लखनऊ कमलेश बहादुर का आदेश प्राप्त हो गया है। उन्होंने बताया है कि विभाग स्वयं किसी भी उपभोक्ता के ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि करता है तो इसके लिए कोई धनराशि नहीं जाएगी। यदि उपभोक्ता विभाग को लिखित में पत्र देकर अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की मांग करता है, तभी उससे ट्रांसफार्मर की धनराशि वसूली जाएगी, अन्यथा नहीं। - दुर्गेश कुमार जायसवाल, अधिशासी अभियंता प्रथम