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समय पर इलाज, रेबीज से बचाव

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एंटो रैबीज दिवस पर खेकड़ा सीएचसी में आयोजित कार्यशाला में शामिल चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी - फोटो : KAHKRA
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खेकड़ा। विश्व रेबीज दिवस पर खेकड़ा सीएचसी पर आयोजित कार्यशाला में स्वास्थ्य कर्मियों को रेबीज से बचाव प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई। समय पर इलाज ही व्यक्ति को रेबीज से बचा सकता है।
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विश्व रेबीज दिवस पर बुधवार को आयोजित कार्यशाला में सीएचसी अधीक्षक डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि किसी भी समय अगर किसी व्यक्ति को कुत्ते, बंदर, गीदड़, लोमड़ी आदि काट ले और वह रेबीज से पीड़ित हो तो वह व्यक्ति की जान पर भारी पड़ सकता है। अगर समय पर इलाज नहीं करवाया और व्यक्ति को रेबीज हुआ तो उसकी मौत हो सकती है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार ब्लाक क्षेत्र में रेबीज फैलने से किसी भी व्यक्ति की मौत का कोई रिकार्ड उपलब्ध नही है। कुत्ते व बंदरों के काटने से बड़ी संख्या में घायल सीएचसी पहुंचते हैं। सीएचसी पर एआरवी टीके लगाने की सुविधा उपलब्ध है। कार्यशाला में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
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रेबीज के लिए बनाई चार श्रेणी
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से रेबीज से संक्रमित कुत्ते या बंदर के काटे मरीजों के लिए चार श्रेणी बनाई गई हैं। इनमें व्यक्ति की चमड़ी पर रेबीज पीड़ित कुत्ते या बंदर की लार गिर जाए या उस पर खरोच लग जाए उसे पहली श्रेणी में शामिल किया है। कुत्ते के काटने पर हल्का खून आने पर दूसरी श्रेणी में, मुंह व हाथ से अलग स्थान पर काटने से हुए जख्म वाले मरीज को तीसरी व मुंह तथा हाथ पर काटने वाले मरीज को चौथी श्रेणी में शामिल किया है। तीसरी व दूसरी श्रेणी में आने वाले मरीज को तो जितना जल्दी हो सके वैक्सीन लगवानी चाहिए। बंदर या कुत्ते के काटे हुए स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन से साफ करना चाहिए। जितना जल्दी हो सके एआरवी यानी एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाएं। पालतू कुत्तों को इंजेक्शन लगवाएं। काटे हुए जख्म पर मिर्च ना बांधे। घाव पर टांके न लगवाएं, पट्टी ना बांधें।
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