संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। दीपावली पर शुभ मुहूर्त के कारण मां लक्ष्मी की इस बार विशेष कृपा बरसेगी। शुभ मुहूर्त में पूजन फलदायी साबित होगा। सोमवार को पांच बजकर 45 मिनट पर प्रदोष काल शुरू होगा। त्योहार पर स्थिर लग्न और प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है।
पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि दीपावली पर पूजन के तीन मुहूर्त बन रहे हैं। दीपावली प्रदोष काल का समय शाम छह बजकर 25 मिनट से शुरू होगा। स्थिर लगन का शुभ मुहूर्त शाम छह बजकर 25 मिनट से रात आठ बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त रात दस बजकर 15 मिनट से साढ़े 11 बजे तक भी पूजन का शुभ मुहूर्त है। दीपावली पर अर्द्ध रात्रि की पूजा रात 12 बजकर 25 मिनट से रात एक बजकर 27 मिनट तक होगी। दीपावली पर्व पर शुभ मुर्हूत में पूजन करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी पूथ्वी लोक में भ्रमण करती हैं। वृष और सिंह लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है। स्थिर लग्न और प्रदोष काल में पूजा का करने का विशेष महत्व होता है।
सर्वार्थ सिद्ध व सौभाग्य का बन रहा संयोग
ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि कार्तिक अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्ध और सौभाग्य का संयोग बन रहा है। पूजन के लिए लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां घर लाएं। लक्ष्मी जी को अर्पित करने के लिए लाल कपड़ा, गुलाल, लौंग, अगरबत्ती, हल्दी, अर्घ्य पात्र, फूलों की माला और खुले फूल, सुपारी, सिंदूर, इत्र, इलायची, कपूर, केसर, सीताफल, गंगाजल, देसी घी, चंदन, चांदी का सिक्का, चीनी, शहद, नारियल और हल्दी की गांठ का प्रयोग करें। पूजा के स्थान पर कलश पर महालक्ष्मी को विराजमान कर उनका पूजन करना चाहिए। गणेश, कलश, वरुण, कुबेर, इंद्र, विष्णु का पूजन करना चाहिए। लक्ष्मी प्राप्ति के लिए महालक्ष्मी के मंत्र ऊं ह्रीं श्री ह्रीं महालक्ष्मयै नम: और ऊं श्री महालक्ष्मी नम: का जाप करना चाहिए। पूजन में श्री सूक्त, कनकधारा स्त्रोत, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं। दीपावली पर गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करने से स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
बागपत में दीपावली पर्व के लिए खरीदारी करते बच्चें- फोटो : BAGHPAT
बागपत के गांधी बाजार में दीपावली पर्व पर पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदती महिला- फोटो : BAGHPAT