बागपत/अग्रवाल मंडी टटीरी/अमीनगर सराय/छपरौली। नगर के श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में दस लक्षण पर्व के आठवें दिन श्री 1008 श्रेयांस नाथ भगवान का विधान किया। जैन समाज के लोगों ने उत्तम त्याग धर्म की पूजा की। पंडित सुलभ जैन ने कहा कि उत्तम त्याग धर्म की प्राप्ति के लिए आवश्यक वस्तुएं जैसे धन संपदा और परिग्रह का त्याग करना पड़ता है। त्याग के बिना मनुष्य की शोभा नहीं होती है। त्याग मनुष्य को संसार के बंधन से मुक्ति की ओर लेकर जाने का सबसे सरल उपाय है।
पंडित सुलभ जैन शास्त्री व मयंक जैन शास्त्री निर्देशन में 1008 अजीतनाथ भगवान, शांतिनाथ भगवान, नेमिनाथ भगवान और पारस नाथ भगवान का अभिषेक किया। तरुण जैन, अरुण जैन, पवन जैन ने शांतिधारा कराई। श्रद्धालुओं ने विधान में 70 अर्घ्य मांडले पर अर्पित किए। शाम को हुई सभा में पंडित सुलभ जैन ने भोग सामग्री प्राप्त नहीं है उसकी इच्छा नहीं करना और भोग सामग्री प्राप्त है उसे छोड़ना ही त्याग है। उत्तम त्याग धर्म की प्राप्ति के लिए आवश्यक वस्तुएं जैसे धन संपदा और परिग्रह का त्याग करना पड़ता है। जो कर्म के उदय से जनित है, विनाशक है व अहंकार को उत्पन्न कराने वाले है, तृष्णा को बढ़ाने वाले है, राग-द्वेष की तीव्रता करने वाले है ऐसे परिग्रह को छोड़ना ही उत्तम त्याग धर्म है। इसके उपरांत संगीतमय महा आरती हुई। महिलाओं और बच्चों ने भगवान के सम्मुख दीपक लेकर नृत्य किया। कार्यक्रम में विनीत जैन, संजीव जैन, सार्थक जैन, यश जैन, तरुण जैन, निशू जैन, ऋषभ जैन, कमल जैन, अनमोल जैन मौजूद रहे।
अग्रवाल मंडी टटीरी के जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान महामंडल पाठ में पंडित चंद्रभान जैन ने कहा कि त्याग हमारी आत्मा को स्वस्थ और सुंदरता बनाता है। पाठ में प्रवीण चंद जैन, महेश जैन, सक्षम जैन, सुधा, दीप्ति, माया, रेनू मौजूद रहे।
कस्बा सराय के जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण पर्व पर श्रद्धालुओं ने श्री जी का जलाभिषेक किया गया। पंडित शिवम शास्त्री ने इंद्र ध्वज महामंडल विधान में पूर्ण आहुतियां कराई। शाम को भजन संध्या में बच्चों ने भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
छपरौली के दिगंबर जैन मंदिर में डॉ. आशीष ने प्रवचन में बताया कि जो वस्तु अपनी नहीं है, उसमें मेरा-मेरा की भावना को छोड़ना ही त्याग है। वह त्याग जब सम्यग्दर्शन के साथ होता है, तब उत्तम त्याग धर्म कहलाता है। कार्यक्रम में सुखपाल चंद जैन, राहुल जैन, चक्की वाले, अंकित जैन, सतीश जैन, गौरव जैन, प्रिंस जैन, ऋषभ जैन, सोनम जैन, आशीष जैन मौजूद रहे।
विधान में श्रीजी के भजनों पर झूमे श्रद्धालु
खेकड़ा। जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने श्रीजी की पूजा-अर्चना कर उत्तम त्याग धर्म को अंगीकार किया। क्षेत्र के बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में आयोजित विधान में चंद्रमति माता ने कहा कि अपनी इच्छाओं को सीमित करना, धन दौलत को सीमित रखना या तय सीमा तक करना, कम संग्रह करने का नाम त्याग है। बुराई से दूर रहना, अच्छाई को ग्रहण करना, काम क्रोध लोभ लालच से दूर रहना, उनका त्याग करने का नाम त्याग है। इस दौरान मंदिर समिति अध्यक्ष त्रिलोकचंद जैन, अंकित जैन, राजेंद्र प्रसाद जैन, महेंद्र जैन, प्रवीण जैन, जितेंद्र जैन, गोकुलचंद जैन आदि श्रद्धालु मौजूद रहे। श्रीशांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर की विशेष पूजा की। श्रद्धालु भगवान को समर्पित भजनों पर भाव विभोर होकर जमकर झूमे। मौके पर प्रवीन जैन, दीपक जैन, प्रथम जैन, अमित जैन, विरेंद्र जैन, शुभम जैन, रीना जैन, स्वाति जैन, रूचि जैन, उर्मिला जैन मौजूद रहे।