बागपत। भगवान शिव सदियों से आराध्य है और भक्त उनका जलाभिषेक करने के साथ ही पूजा-अर्चना करते हैं। इसका बड़ा प्रमाण टेराकोटा निर्मित करीब दो हजार साल पुरानी शिवलिंग की जलहरी है, जो बड़ौत के शहजादराय शोध संस्थान में मौजूद है।
शहजादराय शोध संस्थान के निदेशक इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन ने बताया कि वह बरेली के रामनगर में अहिच्क्षेत्र पुरास्थल के पुरातात्विक सर्वेक्षण के लिए कई बार गए। वहां करीब डेढ़ साल पहले सर्वे के दौरान उनको टेराकोटा से निर्मित शिवलिंग की जलहरी मिली। उनके अनुसार देश में कई जगह पत्थर से निर्मित प्राचीन जलहरी जरूर मिली, लेकिन टेराकोटा (मिट्टी) से बनी जलहरी केवल उसी जगह मिली।
उनके अनुसार उस जलहरी का निर्माण करीब दो हजार साल पहले कुषाण काल में हुआ है और उस समय पत्थर की जलहरी नहीं बनाई जाती थी, इसलिए उसको टेराकोटा से बनाया गया। इसलिए ही यह जलहरी दुर्लभ श्रेणी में आती है। उस जलहरी के मिलने से यह स्पष्ट होता है कि दो हजार साल पहले भी आज की तरह लोग भगवान शिव का जलाभिषेक व पूजा-अर्चना करते थे।