- करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी खिलाडिय़ों को प्रैक्टिस करने में हो रही परेशानी
- खेल विभाग की स्थिति काफी खराब, किसी भी सुविधा का लाभ नहीं उठा रहे खिलाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिले में खेल विभाग की स्थिति काफी खराब है। जहां बहुउद्देशीय क्रीड़ा हॉल का ट्रैक उखड़वाकर छोड़ दिया गया है, वहीं तरणताल भी नहीं चलाया जाता है। इस तरह सरकार के करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी खिलाडिय़ों को खेल सुविधाएं नहीं मिल रही है और उनको परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए सात फरवरी 2008 को जिला मुख्यालय पर बहुउद्देशीय क्रीड़ा हॉल का शिलान्यास किया गया था। क्रीड़ा हॉल में मिनी स्टेडियम का तत्कालीन डीएम मयूर माहेश्वरी ने 13 अक्टूबर 2009 को लोकार्पण किया था। मगर देश-विदेश तक अपनी धाक जमाने वाले बागपत में खेल प्रतिभाओं को सरकार के करोड़ाें रुपये खर्च करने के बाद भी कोई सुविधा नहीं मिल रही है। जिला बहुउद्देशीय क्रीड़ा हॉल की देखरेख के अभाव में हालत खराब हो गई है। जिससे खिलाड़ियों के लिए बनाया गया ट्रक उखड़वा दिया है। इसके अलावा बहुउद्देशीय क्रीड़ा हाल के मिनी स्टेडियम की छत और फर्श भी जर्जर हो गया है। जिससे यहां केवल खिलाड़ियों को भारोत्तोलन और कबड्डी का ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं इस साल भी तरणताल शुरु नहीं हो सका है। उसपर भी लाखों रुपये खर्च किए गए थे और वह पिछले दो साल से बंद पड़ा है।
तरणताल नहीं चलने से खराब हो गया
-यहां खेल विभाग की तरफ से बनाया गया तरणताल पिछले दो साल बंद पड़ा है। इसलिए ही तरणताल भी खराब हो गया है। इसको लेकर जिला क्रीड़ाधिकारी सरिता रानी ने बताया कि बहुउद्देशीय क्रीड़ा हॉल में तरणताल इस साल भी शुरु नहीं होगा। तरणताल शुरु करने के लिए विभाग की ओर से एस्टीमेट तैयार कराया जा रहा है। एस्टीमेट तैयार होने पर शासन को भेजा जाएगा और बजट मिलने में कमियों को दूर कर तरणताल शुरु कराया जाएगा।
जल्द शुरु होगा बॉक्सिंग का प्रशिक्षण
जिला क्रीड़ाधिकारी सरिता रानी ने बताया कि बहुउद्देशीय क्रीड़ा हॉल में फिलहाल बालक और बालिका खिलाड़ियों को सुबह व शाम को भारोत्तोलन और कबड्डी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभाग को बॉक्सिंग का कोच मिला है, जल्द ही खेल कार्यालय में बॉक्सिंग का प्रशिक्षण भी शुरु कराया जाएगा।
नही मिल रही सुविधाएं
-जिले में खेल सुविधाएं नहीं मिल रही है। खिलाड़ी दूसरे जनपदों और राज्यों में खेलों की प्रैक्टिस करने के लिए मजबूर है। - अनुराग, राष्ट्रीय खिलाड़ी बड़ौत
-जिले के स्टेडियम की हालत खराब हो गई है। जिससे खिलाडिय़ों को खेलों का अभ्यास करने के लिए कोई सुविधा नहीं मिल रही है। - गोलू दांगी, लुहारी