बागपत। यहां अपने ही अपनों को मौत के घाट उतार रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में जितनी हत्या की घटनाएं हुई हैं, उनमें 90 प्रतिशत में अपने ही कातिल निकले हैं। किसी ने गुस्से में अपनों को मौत के घाट उतार दिया तो कोई संपत्ति के लालच में अपनों की जान ले रहा है। मनोचिकित्सक ऐसे मामलों के लिए तनाव भरी जिंदगी और नशे को बड़ा कारण माना जा रहा है।
खेकड़ा में बेटे ने अपने पिता की हत्या करा डाली थी। बिनौली के शाहपुर बाणगंगा में नलकूप ऑपरेटर की बेटे ने हत्या कर दी थी। बिजरौल में पत्नी ने अनैतिक संबंधों में पति की हत्या कर दी थी। बिनौली में भाई ने अपनी बहन को मार डाला था तो असारा में चाचा ने भतीजे को मार दिया था। बाखरपुर बालैनी में मां ने बेटी को मार दिया है। बड़ौत में युवक ने पिता व बहनों को मौत के घाट उतार दिया था तो असारा में भाइयों ने बहन व उसके प्रेमी की हत्या कर डाली थी। फखरपुर में चाचा ने बच्चे की हत्या कर डाली थी। बड़ौत में बेटे ने प्रेमिका के चक्कर में मां की हत्या कर डाली थी। फखरपुर में बच्चे की चाचा ने हत्या कर दी थी तो मलकपुर में भाई ने अपने भाई की हत्या करा दी थी।
तनाव और नशे में हो रहा रिश्तों का कत्ल
लोग समाज से कटते जा रहे हैं और ऐसे में वह तनाव में रहने लगते हैं। इसके अलावा नशे की लत भी युवाओं में बढ़ती जा रही है। इससे गलत विचार पैदा होने लगे है। ऐसे में लोगों को गुस्सा ज्यादा आता है। वह गुस्से में ऐसा कर देते हैं। ऐसे लोगों को रोजाना व्यायाम करना चाहिए, पूरी नींद लेनी चाहिए और लोगों के बीच ज्यादा रहना चाहिए। नशे से युवाओं को जितना दूर रखा जाए, उतना बेहतर होगा। डा. अजय कुमार, मनोचिकित्सक