बागपत। सोनीपत के अटेरना गांव के कांवडि़ये वंश की हत्या केवल हीन भावना पैदा होने पर की गई। क्योंकि अटेरना के कांवडि़ये तेज दौड़कर हलालपुर के कांवडि़यों से आगे निकल गए थे और यह हलालपुर के कांवडि़यों को सहन नहीं हुआ। इस तरह चंद समय में पैदा हुई हीन भावना में 12वीं के छात्र कांवडिय़े की जान चली गई। दोघट पुलिस की कार्यप्रणाली भी सही नहीं रही। आरोप है कि वह पीडि़तों की मदद तक के लिए नहीं गई।
हरियाणा के सोनीपत जिले के अटेरना गांव के दीपक व हरिओम ने बताया कि डाक कांवड़ में जल लेकर जब वापस जा रहे थे तो भड़ल व बुढ़ाना के बीच बागपत के हलालपुर गांव की डाक कांवड़ को पीछे छोड़ दिया। यह देखकर वह जोर आजमाइश करने लगे और उन्होंने आगे निकलने का प्रयास किया। मगर अटेरना के कांवडि़ये पिछले दो महीने से तैयारी कर रहे थे और उन्होंने हलालपुर के कांवडि़यों को आगे नहीं निकलने दिया। यही हलालपुर के कांवडि़यों को सहन नहीं हुआ। अटेरना के कांवडि़ये तीन बाइक लेकर चले थे और उनकी एक बाइक लेकर रोकने का प्रयास किया। जिससे वे पीछे रह जाएं और इसको लेकर ही विवाद शुरू हो गया। वह विवाद इतना बढ़ गया कि हलालपुर के कांवडि़यों ने मारपीट, पथराव करने के साथ ही वंश की जान ले ली।
- पुलिस पर पहले टरकाने और फिर बीच रास्ते में छोड़ने का आरोप
अटेरना के दीपक ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली बहुत खराब रही। चाकू लगने से वंश जिंदगी और मौत से जूझ रहा था, मगर पुलिस ने उनकी मदद तक नहीं की। वह पुलिस के हाथ जोड़ते रहे तो पुलिस ने उनको खुद ही बिनौली सीएचसी में जाने के लिए कह दिया। उन्होंने कहा कि उनपर रास्ते में हमला हो सकता है तो उसके बाद बाइक पर दो पुलिस कर्मी उनके साथ गए, मगर वह भी बीच रास्ते से वापस आ गए। आरोप है कि अगर पुलिस की मदद मिलती तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं होती।