अग्रवाल मंडी टटीरी। मौलवी हाजी जहीर अहमद ने कहा कि शब-ए-बरात की रात खुदा की इबादत की रात होती है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद उन्होंने तकरीर करते हुए कहा कि इस रात को बंदे को पूरी रात खुदा की इबादत करनी चाहिए। इबादत में चाहे खुदा का जिक्र हो या नफील नमाज हो या कुरान ए पाक की तिलावत हो, पूरी रात इबादत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस रात को अल्लाह इबादत करने वालों के एक साल के गुनाहों को माफ फरमा देते हैं। शब-ए-बारात के अगले दिन रोजा रखना चाहिए। यह रोजा रखना जरूरी नहीं है, जो रोजा रखना चाहे तो रोजा रख सकता है। शब-ए- बारात का त्यौहार रमजान माह का आगाज करता है। शब-ए-बरात के 15 दिन बाद रमजान का महीना शुरू हो जाता है। सभी को शब-ए-बारात की रात को रात भर जाग कर खुदा की इबादत करनी चाहिए।