साक्षरता का उजाला करने वाले परेशान
बागपत। साक्षर भारत अभियान के तहत निरक्षरों को साक्षर बनाने वाले प्रेरक मानदेय को लेकर अंधेरे में हैं। जिले में नियुक्त किए गए 350 प्रेरक 2018 में अभियान बंद होने के बाद से लगभग दो करोड़ रुपये रुपये के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। शासन स्तर तक भी पत्र भेजकर मानदेय का भुगतान कराने की मांग कर चुके हैं। मगर मानदेय का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिले के केवल 45 प्रेरकों का न्यायालय में जाने के कारण मानदेय का भुगतान हो सका है।
केंद्र सरकार की ओर से 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए साक्षर भारत अभियान चलाया गया था। अभियान के अंतर्गत दो हजार रुपये प्रति माह के मानदेय पर शिक्षा प्रेरक नियुक्त किए गए थे। जिले में 350 शिक्षा प्रेरकों को रखा गया था और लगभग 40 हजार निरक्षरों को साक्षर अभियान से जोड़ा गया था। जिला स्तर पर निरक्षरों की परीक्षा के बाद प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया।
सरकार ने 31 मार्च 2018 को योजना बंद कर दी थी। इसके बंद होने के बाद शिक्षा विभाग की ओर से नियुक्त किए गए प्रेरकों का भुगतान नहीं किया गया। शिक्षा विभाग पर एक करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया चल रहा है। प्रेरक अपने मानदेय की मांग को लेकर विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
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प्रेरकों का विभाग पर डेढ़ से ढाई साल का बकाया
शिक्षा विभाग पर प्रेरकों को डेढ़ से ढाई साल तक का बकाया है। एक साल में 24 हजार रुपये के हिसाब से ढाई साल का लगभग दो करोड़ रुपये का बकाया है। प्रेरक पिछले छह साल से मानदेय की मांग को लेकर विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
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- विभाग की ओर से सिंतबर 2016 के बाद का मानदेय नहीं मिला है। मानदेय की मांग को लेकर छह साल से कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। - हरेंद्र यादव, प्रेरक बुढ़सैनी
- विभाग में दो साल का मानदेय रुका हुआ है। मानदेय की मांग को लेकर जिला स्तर से लेकर शासन तक पत्राचार किया जा चुका है, मगर भुगतान नहीं हुआ है। - दीपक यादव, प्रेरक पूठड़
-- कोर्ट के आदेश पर हुआ 45 प्रेरकों का भुगतान
योजना बंद होने के बाद शासन स्तर से प्रेरकों के मानदेय के लिए ग्रांट जारी नहीं की गई। जिले के 45 प्रेरक मानदेय की मांग को लेकर कोर्ट में चले गए थे। कोर्ट के आदेश पर उनके मानदेय का पूरा भुगतान हो गया है। इनमें पिलाना ब्लॉक के सात और अन्य प्रेरक बिनौली ब्लॉक के हैं। - राजपाल सिंह जैन्थ, जिला समन्वयक