बड़ौत। पंचवटी स्थित शिवमंदिर वर्षों से आस्था का केंद्र है। मंदिर का इतिहास लगभग 200 साल पुराना है। मंदिर की दूर-दूर तक मान्यता है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए नींव रखी थी। मंदिर से कुछ समय तक क्रांतिकारियों की गतिविधियां भी संचालित की गईं थीं।
मंदिर के पुजारी पंडित कुंदन भारद्वाज बताते हैं कि मंदिर की स्थापना 1810 के आसपास व्यापारी ताराचंद लौहड्डा ने कराई थी। यहां पीपल का प्राचीन पेड़ आज भी मौजूद है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस यहां आए और उन्होंने जीर्णोद्धार के लिए नींव रखी थी। इसका शिलापट्ट भी मंदिर में लगा है। मंदिर से कुछ समय तक क्रांतिकारी गतिविधियां भी संचालित की गईं थीं। वर्तमान में मंदिर में शिवलिंग के अतिरिक्त हनुमान, श्रीराधा-कृष्ण, श्रीराम-सीता, लक्ष्मी नारायण, संतोषी माता, सरस्वती माता, काली माता, भैरव बाबा की मूर्तियां स्थापित हैं।
पंडित कुंदन भारद्वाज ने बताया कि मंदिर में पंडित राजेश्वर प्रसाद, पंडित कौशल किशोर भारद्वाज भी पुुजारी रहे हैं। मंदिर में सुबह की पांच बजे भगवान शिव की मंगल आरती होती है। इसके बाद अभिषेक किया जाता है। चंदन, बेलपत्र, भांग, धतूरा, तुलसी मंजरी काय, पुष्प आदि से शृंगार किया जाता है। शाम को आरती होने के बाद भगवान शिव को भोग लगाया जाता है। इस दौरान भजन-कीर्तन भी होते हैं।
- महाशिवरात्रि पर उमड़ते हैं श्रद्धालु
महाशिवरात्रि के नजदीक आते-आते मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है। जिसको देखते हुए पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो जाता है। वहीं, मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं।
- ये भी है मान्यता
श्रावण मास में यहां काफी संख्या में श्रद्धालु पूजन करने के लिए आते हैं। श्रावण मास में प्रतिपदा से पूर्णिमा तक सामूहिक रुद्राभिषेक किया जाता है। नवरात्रों पर सुबह माता की विशेष-पूजा अर्चना और शाम को हवन होता है। जन्माष्टमी पर तीन दिन का विशेष मेला लगता है।
- पूरी होती है मनोकामना
पंड़ित कुंदन भारद्वाज के अनुसार मंदिर में शिवलिंग की 50 दिन तक निरंतर पूजा करने से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। घर से क्लेश दूर रहता हैं।