बड़ौत। पुलिस प्रशासन की जांच किस तरह आगे बढ़ती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सात माह बीत जाने के बाद भी वाजिदपुर गांव में इकॉनोमिक कॉरिडोर निर्माण के लिए बने गड्ढे में डूबकर हुई दो बच्चों की मौत की फाइल एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी। दरोगा बदलते रहे और जांच दबती रही। कंपनी के अधिकारियों पर पुलिस प्रशासन की मेहरबानी से पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिल सका।
पिछले साल 29 जुलाई को शनिवार की देर शाम गड्ढे में लौहड्डा गांव के चारों बच्चे लविश व कुणाल पुत्रगण संदीप, चांद पुत्र सहदेव ,निहाल पुत्र लोकेश पानी में डूब गए। अन्य बच्चों के शोर मचाने पर आसपास के लोगों ने वहां पर पहुंचकर निहाल और कुणाल को पानी से निकाल लिया था, जबकि आठ वर्षीय लविश और सात वर्षीय चांद गड्ढे में बनी दलदल में धंस गए थे और उनकी डूबकर मौत हो गई थी। इसे लेकर लोगों ने हंगामा करते हुए बड़ौत-मेरठ मार्ग पर जाम भी लगा दिया था।
सूचना पर तहसीलदार अमर वर्मा, सीओ सविरत्न गौतम, समेत अन्य ने इकॉनोमिक कॉरिडोर निर्माण करने वाली कंपनी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को समझा-बुझाकर शांत कर दिया था। कंपनी के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया लेकिन सात माह बाद भी मामला फाइलों में दबा हुआ है और पीड़ित परिवार न्याय की आस जोह रहा है।
दरोगा बदलते रहे, जांच दबती रही
बड़ौत। हादसे के दौरान बिनौली रोड पर प्रदीप चौकी प्रभारी थे, उन्होंने ही कोतवाली में कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, कुछ दिनों बाद उनका स्थानांतरण हो गया, जिसके बाद उनकी जगह युवनीश चौकी प्रभारी के रूप में आए, लेकिन उन्हें भी दो बच्चों की मौत की फाइल की याद तक नहीं आई। अब मामले की जांच दरोगा रामकुमार को सौंपी गई है।
दरोगा रामकुमार ने बताया कि मुझे कुछ समय पहले इसकी जांच सौंपी गई थी, लेकिन विभागीय काम अत्यधिक होने के चलते अभी जांच अधूरी पड़ी है। जांच जल्द पूरी कर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों के माध्यम से न्यायालय में फाइल को भेजा जाएगा।
यदि जांच मेें किसी तरह की लापरवाही बरती जा रही है, तो मामला गंभीर है, तत्काल प्रभाव से जांच पूरी कर आगे की कार्रवाई कराई जाएगी। सविरत्न गौतम सीओ बड़ौत।