बागपत। वाजिदपुर गांव के धीरज उर्फ छोला की हत्या की साजिश ऐसी रची गई कि वह साथ घूम रहे खतरे को भांप नहीं सका। धीरज को गांव का ही शोएब अपने भरोसे में लेकर सरकारी स्कूल के बाहर ले गया। जहां पहले से छिपकर बैठे साथियों को कोड वर्ड से इशारा कर बुलाया।
वाजिदपुर गांव के सरकारी स्कूल पर पहुंचते ही शोएब का कोड वर्ड सुनकर निखिल, देवा उर्फ देवेश, सागर और सौरभ भी वहां आ गए। जिनके आते ही शोएब ने धीरज उर्फ छोला को पहली गोली मार दी। इसके बाद अन्य चारों ने भी अपने तमंचे निकालकर धीरज पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर भाग गए। एसपी ने बताया कि शोएब और धीरज की दोस्ती का निखिल ने फायदा उठाया। जिसने शोएब को दोस्ती का हवाला देकर हत्या की साजिश में शामिल किया।
दिल्ली रहने लगा था धीरज का परिवार
एसपी ने बताया कि सन्नी हत्याकांड के बाद धीरज का परिवार दिल्ली जाकर रहने लगा था। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद धीरज भी दिल्ली चला गया था। जिसे साजिश के तहत गांव बुलाकर हत्या की गई।
निखिल के स्टेट्स ने सुलझा दी गुत्थी
एसपी ने बताया कि धीरज की हत्या के दो घंटे बाद तक उसकी शनाख्त नहीं हो पाई थी। जिसके बाद शनाख्त हुई तो लोगों ने निखिल का स्टेट्स देखा। जिसने बदला पूरा होने की बात लिखी तो हत्या की गुत्थी सुलझ गई।