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स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना ही सबसे बड़ा मर्ज

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चांदीनगर (बागपत)। रटौल पीएचसी तक पहुंचना ही मरीजों के लिए सबसे बड़ा मर्ज है, क्योंकि पीएचसी तक जाने वाला रास्ता कच्चा है। जिस पर कीचड़ व जलभराव होने के कारण मरीजों का पीएचसी तक पहुंचना मुश्किल है। इसलिए ही पीएचसी की जगह मरीजों को खेकड़ा सीएचसी पर इलाज कराने जाना पड़ता है। इसके अलावा पीएचसी भवन भी जर्जर हो गया है। पीएचसी जंगल में होने के कारण रात में पीएचसी पर कोई चिकित्सक या स्वास्थ्य कर्मी नहीं रुकता है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
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रटौल पीएचसी पर स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। पीएचसी कस्बे से दूर जंगल में है और वहां तक जाने का रास्ता भी खराब है। जंगल और रास्ता खराब होने के कारण लोग अस्पताल जाने से कतराते है। पीएचसी परिसर में सफाई व्यवस्था नहीं है, चारों और झाड़ियां उगी है। अस्पताल में लोगों के लिए पेयजल और बिजली की भी व्यवस्था नहीं है, जिससे लोगों को वहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही है। केंद्र पर आवास भवन व डिलिवरी लेबर रूम जर्जर हो रहे है। रात में केंद्र पर चिकित्सक न होने के कारण लोगों को या तो प्राईवेट चिकित्सक से अपना उपचार कराना पड़ता है या फिर खेकड़ा जाना पड़ता है।
कस्बे से एक किमी दूर है पीएचसी
नगर पंचायत रटौल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करीब एक किमी दूर बाग में बना है। जिसके करण लोगों को केंद्र जाने में काफी परेशानी होती है। अस्पताल का मुख्य द्वार दो साल से टूटा पड़ा है और अस्पताल परिसर में झाड़ियां उगी हैं। केंद्र पर तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को आवारा पशुओं का डर लगा रहता है।
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रुकने की सुविधा नहीं
रटौल के प्राथमिक केंद्र पर मरीजों के लिए बेड तो लगे हैं, लेकिन इंवर्टर और पेयजल की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
पीएचसी का रास्ता बनवाने के लिए ईओ को पत्र लिखा है, अस्पताल में जल्द ही व्यवस्थाएं ठीक कराई जाएगी। - डॉ. मुकेश कुमार, खेकड़ा सीएचसी अधीक्षक

बिना गेट का रटौल प्राथमिक स्वास्थ केंद्र- फोटो : BAGHPAT

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