बागपत। राजकीय विद्यालयों के शिक्षक 13 साल से पदोन्नति और वरिष्ठता सूची का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति के इंतजार में पिछले 13 साल में 20 शिक्षक बिना पदोन्नति सेवानिवृत्त हो गए हैं। पदोन्नति न होने के कारण कार्यरत और सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों को वेतनवृद्धि का लाभ नहीं मिल रहा है। शिक्षक संघ शिक्षकों की पदोन्नति की मांग को लेकर संघर्ष कर रहा है, मगर कई बार मांग करने के बाद भी शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हो पाई है।
जिले में छह राजकीय इंटर और 13 राजकीय हाईस्कूल विद्यालय हैं। इनमें एलटी के 115 और प्रवक्ता के 115 पद हैं। पिछले 13 साल में इन विद्यालयों में एलटी से प्रवक्ता और प्रवक्ता से प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति नहीं हुई है। शिक्षक 13 साल से पदोन्नति की मांग कर रहे हैं। शिक्षक संघ और शिक्षकों की मांग पर कई बार पदोन्नति की योजना तो तैयार की गई, मगर शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया शुरु नहीं हो पाई। शिक्षकों की पदोन्नति न होने के कारण 13 साल से शिक्षकों को वेतनवृद्धि का लाभ नहीं मिल रहा है। 13 साल में 20 शिक्षक पदोन्नति के बिना ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पदोन्नति न होने से सेवानिवृत्त हो चुके 20 शिक्षकों को वेतनवृद्धि का लाभ नही मिल रहा है।
2009 में हुई थी शिक्षकों की पदोन्नति
राजकीय विद्यालयों में 13 साल पहले 2009 में पदोन्नति हुई थी, मगर इसके बाद कई बार कार्ययोजना तैयार होने के बाद भी शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया शुरु नहीं हो पाई है। जिससे शिक्षकों को वेतनवृद्धि से वंचित रहना पड़ रहा है। - हुकुम सिंह, जिलाध्यक्ष राजकीय शिक्षक संघ
12 साल से शिक्षकों की नहीं जारी हुई वरिष्ठता सूची
12 साल पहले वर्ष 2010 में उत्तरांखड से लगभग 250 शिक्षकों का स्थानांतरण प्रदेश के विद्यालयों में हुआ था। उत्तराखंड से प्रवक्ता के पद से आए शिक्षकों को एलटी के पद पर नियुक्ति मिली थी। 12 साल बीतने के बाद भी शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जारी नहीं की गई है। - अश्वनी कुमार, जिलामंत्री राजकीय शिक्षक संघ