स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत करीब 70 प्रतिशत बजट खर्च कर दिया गया है और अभी कार्य कराए जा रहे हैं। आरोप लगाया गया है कि गांवों में कम राशि खर्च करके ज्यादा दिखाई जा रही है। जिला विकास एवं निगरानी समिति की बैठक तक में इसमें घोटाले का आरोप लगाया गया। जिसके बाद इन 66 गांवों में घोटाले की जांच कराने का फैसला लिया गया है और सभी गांवों में जांच के लिए अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं।
जांच अधिकारियों को नहीं दिए अभिलेख
गांवों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत कराए गए कार्यों की जांच के लिए लोनिवि, जल निगम और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों को लगाया गया है। इन सभी को सूची भेजकर यह जानकारी दी गई है कि किस गांव को कितना बजट मिला था और उसमें से कितना खर्च हो गया है। लेकिन यह जानकारी नहीं दी गई है कि किस-किस कार्य पर कितना-कितना पैसा खर्च किया गया है। उसके अभिलेख भी अधिकारियों को नहीं दिए गए हैं।
असारा, डौला, किरठल में सबसे ज्यादा खर्च
स्वच्छ भारत मिशन फेज टू में अभी तक सबसे ज्यादा पैसा असारा गांव में 97 लाख रुपये में 75 लाख खर्च किए जा चुके हैं। डौला गांव में 78 लाख रुपये में 70 लाख खर्च किए गए है। किरठल गांव में 77 लाख रुपये में से 62 लाख खर्च हुए तो खट्टा प्रहलादपुर गांव में 50 लाख में 49 लाख रुपये खर्च किए गए है। इनके अलावा भी कई गांव ऐसे है, जिनमें खूब पैसा खर्च दिखाया गया है।
ककड़ीपुर व महावतपुर खर्च करने में फिसड्डी
स्वच्छ भारत मिशन फेज टू के तहत कार्य कराने में ककड़ीपुर और महावतपुर सबसे फिसड्डी दिख रहे हैं। जहां ककड़ीपुर में 31 लाख रुपये में केवल आठ लाख खर्च किए गए है, जबकि महावतपुर गांव में 36 लाख रुपये में 15 लाख और बावली में 60 लाख रुपये में 19 लाख खर्च किए गए है।
स्वच्छ भारत मिशन फेज टू के तहत कराए गए कार्यों की 66 गांवों में जांच कराई जाएगी। इसके लिए अधिकारी नियुक्त कर दिए गए है। जांच में जिस तरह की बात सामने आएगी, उसके आधार पर आगे कार्रवाई होगी। - एमएल व्यास, सीडीओ