फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बारिश का कहर: काठा में ठोकरें डूबीं, खेतों में कटान शुरू, बर्बाद हो गई मूली और पालक की फसल

Thu, 29 Sep 2022 12:19 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण किनारों पर खेतों में कटान होने लगा और काठा गांव में बनी नवनिर्मित ठोकरें भी यमुना में डूब गईं।
विज्ञापन
फसलों हुईं जलमग्न - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दो दिन बारिश होने के बाद बागपत यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जिससे खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं हैं। उधर काठा गांव में बनी ठोकरें डूब गईं और खेतों में कटान होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई। हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में एक साथ 2.97 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाने के जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया, नदी दो दिन से खतरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर बह रही है। यमुना का जलस्तर बुधवार को भी कम नहीं हुआ।
विज्ञापन


यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण किनारों पर खेतों में कटान होने लगा और काठा गांव में बनी नवनिर्मित ठोकरें भी यमुना में डूब गईं। इसके अलावा फैजपुर निनाना व जागोस गांव का अंत्येष्टि स्थल भी जलमग्न रहा। खेतों में यमुना का पानी भरने के कारण किसानों की फसल खराब हो गई। उधर, बारिश के बाद हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। मंगलवार रात से बुधवार रात तक तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया।

 

यमुना का जलस्तर बढ़ने से बागपत में डूबीं निवाड़ा और गौरीपुर के किसानों की फसलें।- फोटो : BAGHPAT


बर्बाद हो गई मूली और पालक की फसल
बरसात में यमुना का जलस्तर बढ़ने पर खेतों में उगाई सब्जी की फसल बर्बाद हो गई थी। अब नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने पर मूली व पालक की फसल जलमग्न होने से बर्बाद हो गई। - लख्मीचंद, किसान

विज्ञापन


यह भी पढ़ें: हैरतंगेज: युवक के पेट में डॉक्टरों को दिखा कुछ ऐसा, ऑपरेशन किया तो रह गए दंग, सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे आप

किसानों को दिया जाए मुआवजा
यमुना का जलस्तर बढ़ने से खेतों में खड़ी फसल खराब हो गई। जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हो गया। किसानों ने कर्ज लेकर खेतों में फसल उगाई थी, जिसके बर्बाद होने से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को खराब फसल का मुआवजा दिया जाए। - धर्मवीर कश्यप, किसान।
विज्ञापन


कटान की संभावना, यमुना से दूर रहे
यमुना में छोड़ा 2.97 लाख क्यूसेक पानी जिले से होकर गुजर चुका है। अब यमुना का जलस्तर घटने पर कटान होने की संभावना ज्यादा हो गई है। जिसके चलते किसान व ग्रामीण यमुना किनारे पर न जाए। - उत्कर्ष भारद्वाज, नोडल अधिकारी बाढ़ राहत एवं नियंत्रण।

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें