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Baghpat News: सरफाबाद में कभी नहीं चले लाठी डंडे, यहां बहती है प्यार की गंगा

Wed, 02 Oct 2024 03:52 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
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रटौल। सरफाबाद ऐसा गांव है, जहां आज तक लाठी-डंडे नहीं चले। इस गांव में प्यार की गंगा बहती है। गांव में होने वाले मामूली विवादों को आपस में बैठकर निपटा दिया जाता है। इससे ग्रामीणों को कभी थाने और कचहरी के चक्कर नहीं लगाने पड़े। जो भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा है।
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जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर गाजियाबाद जिले की सीमा पर हिंडन नदी किनारे बसे सरफाबाद गांव की आबादी करीब पांच हजार है। गुर्जर जाति के बाहुल्य सरफाबाद गांव में ब्राह्मण, लुहार, सुनार, कश्यप, वाल्मीकि और मुस्लिम शेख जाति के परिवार रहते है। इस गांव में तीन मंदिर, मस्जिद, मदरसा और ईदगाह मौजूद है और शिक्षा के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय और प्राइमरी जूनियर विद्यालय बना हुआ है।
गांव की खासियत यह है कि ग्रामीण आपस में कभी रंजिश नहीं रखते, जिनके बीच कभी विवाद भी नहीं हुआ। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि जब कभी दो पक्षों में कोई विवाद हुआ तो बड़े बुजुर्गों ने आपस में बैठकर उसे सुलझाकर समाधान करा दिया। इसके चलते गांव में पुलिस का आना जाना भी कम ही रहता है। पुलिस रिकार्ड में सरफाबाद को आदर्श गांव का दर्जा दिया जाता है।
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ईपीई बना तो दर्ज हुए हादसों के मुकदमे सरफाबाद गांव के क्षेत्र में वर्ष 2020 में जानलेवा हमला होने का मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसमें झगड़ा करने वाले दूसरे गांव के रहने वाले हैं। इसके अलावा ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे बनने के बाद हादसे होने लगे। इसके चलते सरफबाद क्षेत्र में सड़क हादसों के कई मुकदमे दर्ज किए गए।
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800 साल पहले बसा था सरफाबाद गांव
बुजर्गों के अनुसार सरफाबाद गांव करीब 800 साल पहले बसा था, जो मुस्लिम शेख बिरादरी का था। बताया कि गांव के जमीदार सरफुद्दीन शेख ने गाजियाबाद जिले के सिरौली गांव के गुर्जर समाज के लोगो को यहां जमीन देकर बसाया था।

बुजुर्गों का समझौता मानते हैं युवा
गांव में कभी कोई बड़ी आपराधिक घटना नही हुई है और गांव के लोग भाईचारे के साथ रहते हैं। जब भी आपस में मनमुटाव होता है थाने जाने के बजाय दोनों पक्षों के बुजुर्ग आपस में बैठकर समझौता करते हैं, जिसे युवाओं को मानना पड़ता है। यहीं कारण है कि यहां कभी बड़ी घटना नहीं हुई। - कोमल गुर्जर ग्राम प्रधान

दस साल में एक दो विवाद हुए, मगर थाने नहीं गए सरफाबाद गांव की दस साल प्रधान रही हूं। मेरे दस साल के कार्यकाल में एक-दो विवाद हुए, मगर शिकायत करने थाने नहीं गए। इन विवाद को आपस में बैठकर निपटा दिया गया। - बबीता देवी पूर्व प्रधान

सभी लोग मिलकर मनाते हैं त्योहार
मेरी उम्र 80 साल से ज्यादा हो चुके हैं, जहां कभी आपराधिक घटना नहीं हुई। मिश्रित आबादी वाले गांव में दीपावली, ईद समेत अन्य त्योहार आपस में मिलकर मनाए जाते हैं। इसके अलावा दुख दर्द में सभी लोग एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। - हाजी अनवर अली

कोई ग्रामीण नहीं जाता कचहरी सरफाबाद गांव के ग्रामीणों में कोई विवाद नहीं है, जिसके चलते किसी भी ग्रामीणाें को कचहरी और थाने के चक्कर की जरूरत नहीं पड़ती। न ही सरफाबाद गांव का कोई विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। यहां के अधिकांश ग्रामीण खेती पर निर्भर है और अपने परिवार का पालन पोषण करते है। - भोपाल सिंह
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वर्जन-सरफाबाद गांव में कभी कोई आपराधिक घटना नहीं हुई। अगर कोई विवाद हुआ होगा तो कोई शिकायत करने चांदीनगर थाने में नहीं गया और न ही कभी मुकदमा दर्ज हुआ। सरफाबाद के क्षेत्र का केवल एक मुकदमा दर्ज हुआ था, मगर वह भी अन्य गांव के लोगों के बीच झगड़े का मुकदमा था जो वहां के जंगल में जाकर झगड़ा कर रहे थे। सरफाबाद गांव क्षेत्र में सिर्फ ईपीई पर हुए हादसों के मुकदमे दर्ज किए गए। - एनपी सिंह, एएसपी।
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