बागपत। लोकसभा चुनाव में सपा व बसपा भले ही हर बार मैदान में उतरते हों मगर यहां उनका जीत का सूखा खत्म नहीं हो रहा है जबकि अन्य सभी पार्टियों का जीत के साथ यहां खाता खुल चुका है। इस बार सपा व बसपा को बड़ी उम्मीद है, मगर यह चुनाव परिणाम के बाद पता चलेगा कि उनका सूखा इस बार खत्म होता है या नहीं।
बागपत लोकसभा सीट वर्ष 1967 में अस्तित्व में आई। यहां ऐसा नहीं है कि सपा व बसपा के प्रत्याशी मैदान में नहीं उतरते। इनके प्रत्याशी उतरते जरूर हैं, मगर वे दूसरे स्थान तक ही पहुंच पाते हैं। अगर इन दोनों पार्टियों की अभी तक की स्थिति को देखा जाए तो यहां 1996 में पहली बार सपा से मुखिया गुर्जर और बसपा से चरण सिंह त्यागी मैदान में उतरे। इस चुनाव में मुखिया गुर्जर एक लाख 49 हजार 709 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे तो चरण सिंह त्यागी 55 हजार 869 वोट के साथ चौथे स्थान तक पहुंचे।
वर्ष 1998 में सपा से डाॅ. मेहराजुद्दीन चुनाव मैदान में उतरे तो बसपा से अजय ने चुनाव लड़ा। डाॅ. मेहराजुद्दीन एक लाख 34 हजार 696 वोट लेकर तीसरे और अजय 79 हजार 153 वोट के साथ चौथे स्थान पर रहे। वर्ष 1999 में बसपा से टेकचंद और सपा से डाॅ. मेहराजुद्दीन मैदान में उतरे। इस चुनाव में बसपा 98 हजार 900 वोट लेकर तीसरे स्थान पर आ गई तो सपा 59 हजार 807 वोट के साथ चौथे स्थान पर खिसक गई। वर्ष 2004 में बसपा से औलाद अली चुनाव लड़े तो सपा के गठबंधन के साथ रालोद का प्रत्याशी मैदान में उतरा। इस चुनाव में बसपा एक लाख 32 हजार 543 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही। इस तरह ही वर्ष 2009 में बसपा से मुकेश शर्मा और सपा से साहब सिंह मैदान में उतरे। मगर इस चुनाव में भी बसपा एक लाख 75 हजार 611 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही तो सपा 45 हजार 644 वोट के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गई। वर्ष 2014 के चुनाव में सपा से गुलाम मोहम्मद और बसपा से प्रशांत चौधरी ने किस्मत आजमाई। मगर इस बार भी सपा दो लाख 13 हजार 609 वोट के साथ दूसरे और बसपा एक लाख 41 हजार 743 वोट के साथ चौथे स्थान पर रही।
बसपा और सपा के चुनाव लड़ने के बाद से ये रहे विजेता
1996 चौधरी अजित सिंह कांग्रेस
1997 चौधरी अजित सिंह निर्दलीय
1998 सोमपाल शास्त्री भाजपा
1999 चौधरी अजित सिंह रालोद
2004 चौधरी अजित सिंह रालोद
2009 चौधरी अजित सिंह रालोद
2014 सत्यपाल सिंह भाजपा
2019 सत्यपाल सिंह भाजपा