बागपत। बारिश के पानी का संरक्षण, भूजल स्तर ऊंचा उठाने व तालाबों को संरक्षित करने के लिए जिले के छह ब्लॉकों के 75 तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में तब्दील करने के लिए चयन किया गया था। जिसमें अगस्त माह तक सभी तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में तब्दील करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे बारिश के पानी को भूजल में उतारा जा सके।
अब बारिश शुरू हो गई है, लेकिन अभी तक चयनित किए गए 75 तालाब अमृत सरोवर के रूप में तब्दील नहीं हो सके। जिसमें 37 तालाबों पर काम शुरू हो गया, जिनकी खोदाई जोरों पर है, लेकिन अभी तक 38 तालाबों पर काम भी शुरू नहीं हो सका है। इसके अलावा राजस्व रिकार्ड के 1155 तालाबों में से 305 का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उधर सफाई नहीं होने के कारण जिले के अधिकांश तालाब गांव के गंदे पानी से ओवरफ्लो हो चुके हैं, तो कुछ गंदगी से अटे पड़े हैं।
बजट के अभाव में नहीं बन रहे नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
भूजल स्तर ऊपर उठाने के लिए जिलेभर में सरकारी भवनों व सरकारी स्कूलों में 350 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हुए हैं, जबकि 1150 शॉकपिट बनाए गए हैं। अब शासन से बजट जारी नहीं होने के कारण नए हार्वेस्टिंग नहीं लगाए जा रहे। उधर प्राइवेट भवनों व फैक्टरियों में बारिश के पानी को धरातल में उतारने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी नहीं लगे। जिससे बारिश का पानी नालियों में बह रहा है।
बिनौली ब्लाक की स्थिति खतरनाक
भूजल संरक्षण के मामले में बिनौली ब्लॉक की स्थिति काफी खतरनाक हो चुकी है। जहां वर्ष 2022 तक भूजल स्तर में 26 मीटर गिरावट दर्ज की गई। उधर बागपत ब्लॉक में 15.49 मीटर, बड़ौत ब्लॉक क्षेत्र में 17.34 मीटर, छपरौली ब्लॉक क्षेत्र में 15.28 मीटर, खेकड़ा ब्लॉक में 20.98 मीटर व पिलाना ब्लॉक में 21.95 मीटर भूजल गिरावट दर्ज की गई।
कोट...
- जिले में अमृत सरोवर के लिए चयनित तालाबों पर काम चल रहा है। बजट नहीं मिलने के कारण नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाए जा रहे। अटल भूजल योजना के तहत जिले के लोगों को जल दोहन कम करने, बारिश के पानी का संचय व बड़े भवनों में हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। विपिन त्यागी, जेई, लघु सिंचाई विभाग।