बड़ौत। उप्र पुलिस में कंप्यूटर ऑपरेटर की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में पकड़े सॉल्वर गैंग का सदस्यों का यह खेल काफी समय से आवास विकास काॅलोनी में चल रहा था। सॉल्वर गैंग के सदस्य युवाओं से नौकरी लगवाने व परीक्षा पास कराने के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे थे, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि कोतवाली पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
बताया जा रहा है कि गढ़ी श्याम जनपद शामली निवासी सीआरपीएफ के जवान बिजेन्द्र चौहान ने तकरीबन दो साल पहले दुहाई गाजियाबाद में विधान पब्लिक स्कूल में करीब 250 कंप्यूटर सिस्टम की लैब तैयार की थी। जिसको बाद में बिजेन्द्र चौहान ने देखरेख के लिए रचित पुत्र ब्रह्मपाल निवासी भाजू जनपद शामली को देखरेख के लिए दे दी थी। इसके बाद रचित का संपर्क बिनौली रोड निवासी दानवीर और बिहारीपुर गांव निवासी ग्राम सचिव कर्मवीर से हुआ।
कर्मवीर ने अपनी बहन अरुणा जो आवास विकास काॅलोनी में किराए के मकान में रहती थी, वहां पर एक कमरा अपने रिश्तेदार राजपाल जो कैनरा बैंक रटौल में कर्मचारी बताया जा रहा है उसे बातचीत कर लिया। राजपाल ड्यूटी पर चला जाता और उसके पीछे सॉल्वर गैंग का यह खेल बदस्तूर जारी रहा। लेकिन कोतवाली पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसी का फायदा उठाते हुए सॉल्वर गैंग के सदस्यों ने न जाने कितने युवाओं से ठगी की।
वर्जन-
ऐसी बात नहीं है, हाल ही में आवास विकास काॅलोनी में सॉल्वर गैंग के सदस्य आए थे, तभी मुखबिर की सूचना पर उन्हें धर दबोचा लिया गया। - संजय कुमार इंस्पेक्टर बड़ौत।