रमाला। जर्जर भवन में स्कूल का संचालन किया जा रहा है। स्कूल की छत जगह-जगह से टूटने के कारण बच्चे कमरों के बाहर बैठने को मजबूर हैं।
कंडेरा के प्राथमिक विद्यालय नंबर तीन का भवन जर्जर अवस्था में है तथा इसकी छत भी काफी कमजोर हो चुकी है। जर्जर हो चुके भवन की दीवारों तथा छत का प्लास्टर टूट कर नीचे गिर रहा है। भवन की कमजोर छत का प्लास्टर टूटने एवं छत के लेंटर की ईंट दिखाई देने से स्कूल के बच्चों तथा अध्यापकों में भय का माहौल बना है। छत का प्लास्टर गिरने पर बच्चे खुले में बैठने पर मजबूर हैं। प्रधानाध्यापक स्नेह प्रभा ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय कंडेरा नंबर तीन में 100 से ज्यादा बच्चे हैं। स्कूल भवन में दो कमरे तथा एक बरामदा बहुत जर्जर अवस्था में है। इस जर्जर भवन की शिकायत शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को लगातार भेजी जा रही है। किसी भी मौसम में ऐसी छत के नीचे बैठना खतरे से खाली नहीं है। अध्यापकों ने बताया कि जब सुबह विद्यालय आए तो स्कूल की छत के प्लास्टर के टुकड़े कमरे में बिखरे थे, यदि यह घटना विद्यालय समय में होती तो बच्चों के साथ बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। अभिभावक भी बच्चों को स्कूल में भेजने से कतरा रहे हैं। स्कूल भवन की दयनीय हालत देखकर बच्चे तथा अध्यापक खुले में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। प्रधानाध्यापक और अभिभावकों ने जिलाधिकारी तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी से स्कूल में जर्जर भवन के स्थान पर नये भवन के निर्माण की मांग की है।