रटौल। सब्जियों के राजा आलू के भाव का मंडियों में बाजा बज गया है। जिससे किसानों की लागत भी नहीं निकल रही है। किसानों ने आलू बाद में अच्छे दाम मिलने पर बेचने के लिए शीतगृह में रखवाने का प्रयास किया तो वहां भी जगह नहीं मिल रही है। ऐसे में खेत के किनारे पर ढेर लगाना पड़ रहा है और उसमें आलू खराब होने लगे हैं।
ललियाना, चमरावल, सरफाबाद, ढिकौली, पांची, रटौल, बड़ागांव, मुबारिकपुर समेत कई गांवों के किसान पिछले कई वर्षों से गन्ना छोड़ सब्जी की खेती कर रहे हैं। जिसमें सबसे ज्यादा आलू की खेती करते हैं।
हजारों एकड़ भूमि में आलू की पैदावार अच्छी होने और मंडियों में सही भाव मिलने पर किसान मुनाफा कमाते आ रहे हैं। मगर इस साल आलू की फसल पर पहले मौसम की मार पड़ी तो अब सब्जी मंडियों में आलू की बेकद्री देखने को मिल रही है।
दिल्ली-हरियाणा से लेकर कई राज्यों की मंडियों में आलू का भाव काफी कम मिल रहा है। किसानों ने बताया कि 55 किलो की बोरी सिर्फ 150 से 200 में बिक रही है। जिससे मजदूरी और वाहनों का किराया भी नहीं मिल रहा।
दाम बढ़ने की उम्मीद, लेकिन शीतगृह में जगह नहीं
किसानों को उम्मीद है कि आलू के कुछ समय बाद दाम बढ़ सकते हैं, लेकिन उस समय तक के लिए आलू को शीतगृह में रखना होगा। किसान वहां आलू लेकर पहुंच रहे हैं तो वहां जगह नहीं होने की बात कहकर वापस भेजा जा रहा है। मेरठ, बुलंदशहर के अधिकतर शीतगृह में जगह नहीं होने की बात कही जा रही है। किसान सरफराज, बबलू आदि ने बताया कि मंडी में सही भाव नहीं मिलने पर खोदाई कराकर आलू की फसल का खेत के किनारे ही ढेर लगाया गया है।
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किसानों को होगा नुकसान
सब्जी मंडियों में आलू का अच्छा भाव नहीं मिलने के कारण आलू के ढेर खेतों के किनारे लगा दिए हैं। यह उम्मीद है कि आलू के दाम बढ़ सकते हैं, लेकिन वहां पड़ा हुआ आलू खराब होने लगा है। - नवल सिंह
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आलू के दाम से नहीं निकल रही मजदूरी और किराया
खेत में आलू की खोदाई से लेकर गाड़ियों में लादने और मंडी तक पहुंचाने का किराया भी नहीं निकल रहा। खेत खाली कराने के लिए किसानों को अपनी जेब से पैसा देना पड़ रहा है। - चौधरी मुबारिक
शीतगृह में जाते ही महंगा हो जाता है आलू
खेतों में आलू की खोदाई शुरू होते ही भाव कम हो जाता है। जबकि शीतगृह में रखने के बाद आलू बेचा जाता है तो दाम अच्छे मिलते हैं। सरकार को आलू उत्पादक किसानों को नुकसान से बचाने के लिए कोई समाधान निकालना चाहिए। - ओमदत्त यादव
लागत के अनुरूप नहीं मिला भाव
आलू की खेती करने वाले किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान होने का खतरा सताने लगा है। इस बार आलू की फसल उगाने में 10 हजार रुपये बीघा का खर्चा आया, लेकिन किसानों को लागत के अनुसार भाव नहीं मिला। शीतगृह में भी आलू के लिए जगह नहीं मिल रही। - ललित त्यागी
कोट...
आलू को 650 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदने की योजना अभी हमारे यहां नहीं है। यह केवल पांच जिलों में शुरू करने की बात कही जा रही है। यह समस्या जरूर आ रही है कि शीतगृह में आलू रखने की जगह नहीं मिल रही है। अगर किसी किसान को इस तरह की समस्या हो रही है तो वह विभाग में संपर्क कर सकते हैं और उनका आलू शीतगृह में रखवाने की व्यवस्था कराई जाएगी। - दिनेश कुमार अरूण, जिला उद्यान अधिकारी