बड़ौत। बकाया गन्ना भुगतान की मार झेल रहे किसानों की गन्ने की फसल को पोक्का बोइंग रोग ने अपनी चपेट में ले लिया है। कृषि विभाग के अनुसार रोग अब तक जनपद की 25 फीसदी गन्ने की फसल को अपनी चपेट में ले चुका है।
मौसम में बार-बार परिवर्तन इस रोग के लिए अनुकूल माना जा रहा है। पोक्का बोइंग रोग फफूंदी जनित रोग होता है, जो जून से सितंबर तक गन्ने की फसल में लगता है। उधर तेजी से फैल रहे रोग को देखते हुए किसान चिंतित हैं। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित राजकीय बीज भंडार पर तैनात एडीओ कृषि रक्षा अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि फसल में रोग लगने पर पौधे की पत्तियों का रंग बदलने लगता है तथा पत्तियां नीचे की ओर मुड़ने लगती हैं। गन्ने की अगली पत्तियों व नई निकल रही पत्ती पर इस रोग का असर होता है। इस रोग से प्रभावित पत्ती सूख जाती हैं। रोग लगने पर फसल की पैदावार पर असर पड़ता है, जिससे फसल का उत्पादन घट जाता है। जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।
कृषि विभाग ने रोग से फसलों को बचाने के लिए जारी की एडवाइजरी
बड़ौत। फसल को पोक्का बोइंग रोग से बचाने के लिए कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि बावस्टीन से बीजोपचार कर बुआई करें तथा रोग ग्रस्त पौधे को उखाड़कर मिट्टी में दबा देना चाहिए। प्रभावित फसल में कापर आक्सीक्लोराइड का 400 ग्राम मात्रा का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर, इसमें इमीडाक्लोरोप्रिड 100 एमएल मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव के दौरान खेत में नमी होना जरूरी है। एक छिड़काव के 10 दिन के बाद दूसरा छिड़काव करने से रोग पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।