बागपत। पौधरोपण जन अभियान के तहत यहां एक ही दिन में 11 लाख 68 हजार पौधे लगाने का दावा किया गया। लेकिन उनमें आधे से ज्यादा पौधे सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही की खाद लगने के कारण दस दिन में सूख गए। हालात यह रहे कि जहां से मंत्री और नोडल अधिकारी ने पौधे लगाकर अभियान का शुभारंभ किया था, वहां से पौधे ही गायब हो गए।
यहां 22 जुलाई को पौधरोपण जन अभियान का शुभारंभ किया गया था। इसके लिए बालैनी में डौलचा रोड पर मुख्य कार्यक्रम में मंत्री धर्मपाल सिंह और नोडल अधिकारी एवं आबकारी आयुक्त डाॅ. सेंथिल पांडियन सी ने पौधे लगाए थे। वन विभाग की चार हेक्टेयर भूमि पर पीपल, बरगद, गूल्लर, जामुन, औषधीय प्रजाति के 4800 पौधे लगाने का दावा किया गया था। जबकि उस एक ही दिन में जिले में 11 लाख 68 हजार 909 पौधे लगाने का दावा किया गया। उस दिन पौधों का संरक्षण करने की बड़ी-बड़ी बात कही गई, लेकिन दस दिन भी विभाग उनका ध्यान नहीं रख सका। अधिकारियों की लापरवाही के कारण आधा से ज्यादा पौधे सूखने लगे है। क्योंकि उनमें अभी तक एक बार भी पानी नहीं डाला गया है और उनको केवल बारिश का सहारा मिला है। जबकि देखरेख के अभाव में काफी जगह पौधे उखाड़ दिए गए।
मंत्री के हाथों से लगाए पौधे गायब हो गए
अभियान के तहत डौलचा रोड पर बड़ा कार्यक्रम किया गया था और वहां सबसे ज्यादा पौधे लगाए गए थे। मंत्री धर्मपाल सिंह समेत अन्य अधिकारियों के हाथों से वहां पौधे लगवाए गए थे। लेकिन मंत्री के हाथों से लगवाए गए पौधों का संरक्षण ही अधिकारी नहीं कर सके और जिस जगह पर मंत्री ने पौधे लगाए थे, वहां काफी पौधे गायब हो गए है। जबकि काफी पौधे सूख गए है।
इन जगहों पर सूख गए पौधे
डौलचा मार्ग, मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे, पुलिस लाइन, कोर्ट रोड, विकास भवन के पास, बड़ौत, खेकड़ा समेत अन्य जगह लगाए गए पौधे पानी नहीं मिलने की वजह से सूख गए। जबकि काफी जगह से पौधे ही गायब हो गए।
पौधरोपण जन अभियान में सभी विभागों ने अपने लक्ष्य के अनुसार अलग-अलग जगहों पर पौधे लगाए, जिनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी विभागों को दी गई थी। पौधों को दिखवाया जा रहा है कि किस-किस जगह पर क्या समस्या है। उसके लिए जिम्मेदारों से जवाब मांगा जाएगा। - हेमंत कुमार सेठ, जिला वन अधिकारी