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ट्रक चोरी होने पर बीमा कंपनी को सात लाख रुपये देने के आदेश

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ट्रक चोरी होने पर बीमा कंपनी को सात लाख रुपये देने के आदेश
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बागपत। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ट्रक चोरी के मामले में सात लाख और भैंस मरने के मामले में 85 हजार रुपये क्लेम देने का बीमा कंपनियों को आदेश दिया है। तीसरे मामले में विद्युत निगम के अधिकारियों को कनेक्शन को स्थानांतरित करने या काटने के निर्देश दिए।
न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में बंदपुर गांव के रहने वाले विपिन ने एक वाद दायर किया था। जिसमें कहा गया था कि उसने अपने ट्रक का बीमा जनवरी 2016 में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। उसका ट्रक 26 अगस्त 2016 की रात को गांव से चोरी हो गया। उसने क्लेम के लिए बीमा कंपनी में फाइल लगाई, जिसे कंपनी ने निरस्त कर दिया। इस मामले में आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह, सदस्य राजीव कुमार व मीनाक्षी जैन ने सुनवाई के बाद बीमा कंपनी को सात लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने के आदेश दिए। पांच हजार रुपये परिवाद खर्च भी देना होगा।
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नौरोजपुर गुर्जर गांव की रहने वाली सुनीता देवी ने भी आयोग में वाद दायर किया था। जिसमें कहा था कि उन्होंने तीन भैंसों का दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से जून 2018 में बीमा कराया था। उनमें से एक भैंस की मौत हो गई, लेकिन बीमा कंपनी ने उनकी क्लेम की फाइल को निरस्त कर दिया। इसमें आयोग ने बीमा कंपनी को छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 85 हजार रुपये वादी सुनीता देवी को देने के आदेश दिए। इसके साथ ही पांच हजार रुपये परिवाद खर्च के देने होंगे।
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हिलवाड़ी गांव के किसान रामपाल सिंह ने आयोग में वाद दायर किया था कि उसके पिता राजसिंह की हिलवाड़ी में जमीन थी, जिसमें अन्य कई सहखातेदार थे। जिसमें नलकूप लगा हुआ था और उसका विद्युत कनेक्शन था। उसके पिता का काफी साल पहले देहांत हो गया था और उनकी जमीन का बंटवारा हो गया था। जिसके बाद नलकूप व विद्युत कनेक्शन सहखातेदारों के हिस्से में आया था। इसके बावजूद विद्युत निगम उसके मृतक पिता के नाम पर बिल भेजता रहा और उसके मृतक पिता के नाम पर दो लाख रुपये की रिकवरी भेज दी। जबकि वह लगातार स्थिति स्पष्ट करने के लिए अधिकारियों को शपथ पत्र देता रहा। इस मामले में आयोग ने फैसला सुनाया है कि विद्युत कनेक्शन को सहखातेदार के नाम स्थानांतरित किया जाए या उसे काटा जाए। इसके साथ ही उसका इस्तेमाल करने वाले के नाम बिल भेजा जाए।
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