बड़ौत (बागपत)। उपाध्याय गुप्ति सागर महाराज ने कहा कि भक्ति में बहुत शक्ति होती है। मगर, यह भक्ति साफ मन से सच्चाई से और श्रद्धा से होनी चाहिये।
शुक्रवार को दिगंबर जैन अतिथि भवन में आयोजित धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण से किया गया। उपाध्याय महाराज ने कहा कि भक्ति में बहुत शक्ति होती है लेकिन वह भक्ति साफ मन से सच्चाई से श्रद्धा से होनी चाहिए ना कि दिखावे के लिए। बड़ी विडंबना है कि आज प्राणि भगवान की भक्ति मन से कम दिखावे के लिए और नाम शोरहत के लिए ज्यादा करता है। आज की पीढ़ी का प्राणी भगवान, अपने माता पिता और गुरुओं की भक्ति करने की जगह उनकी उपेक्षा करता है। उनका सम्मान नहीं करता। अगर माता पिता का गुरुओं का सम्मान करोगे तो जीवन में कितनी भी विपत्ति आ जाए, उसमें विजेता बनकर ही निकलोगे। इसलिए भगवान, माता पिता और गुरुओं की हमेशा श्रद्धा और मन से भक्ति करनी चाहिए। जीवन क्षण भंगुर है, कभी किसी का बुरा मत करो। माता पिता और गुरुओं की सेवा करों, इससे आपके जीवन में समृद्धि आएगी। धर्म सभा का संचालन अमित जैन ने किया। पंकज जैन, अजय, अनिल सुखमाल, दिनेश, राजकुमार, सिद्धार्थ, आदिश, सुमन पिंकी, कृष्णा, सुषमा, मोनिका, अनीता, दीपा आदि मौजूद रहे।