संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कैंसर ने हिंडन एवं कृष्णा नदी किनारे के गांवों को जकड़ लिया है। इन गांवों का भूजल दूषित हो गया है। उसे पीने से कैंसरग्रस्त से लोगों की मौत हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार यहां कैंसर के 176 मरीज हैं। इनमें सबसे ज्यादा करीब 110 मरीज हिंडन एवं कृष्णा नदी किनारे के बूढ़पुर, गांगनौली, भगवानपुर नांगल, बामनौली, गढ़ी कलंजरी, सरफाबाद, नवादा आदि गांवों में हैं। हिंडन और कृष्णा नदी के पानी की जांच कराने पर फ्लोराइड, क्रोमियम, कैडमियम, निकिल, आर्सेनिक आदि रासायनिक तत्व काफी मात्रा में बढ़े हुए हैं। इन गांवों में दूसरा स्रोत नहीं होने से ग्रामीणों को हैंडपंप का दूषित पानी पीना पड़ता है।
कैंसर से हुई मौत
बीते तीन साल में गढ़ी कलंजरी में कैंसर से वीरज मोहन, बनारसी, जयभगवान, रामधन, भुल्ले, नेमसिंह, किरण, तेजपाल, हरबती, वीरसिंह, हरलाल की मौत हो चुकी है। बाला देवी एवं चरण सिंह का दिल्ली में उपचार चल रहा है। वहीं, गांगनौली गांव की स्थिति भी ऐसी है। यहां कैंसर लोगों को चपेट में ले रहा है। इस गांव में तेजपाल, प्रभात, ब्रह्मसिंह, हरपाल, बृजपाल, निरंजन, रामनिवास, संजीव, सगीर, किरण आदि की मौत हो चुकी है। वहीं, ओमसिंह, विनोद, संजीव, कपिल, विपिन आदि ने कैंसर से जंग भी जीती है।
यहां जांच की नहीं सुविधा
डिप्टी सीएमओ डाॅ. अजेंद्र मलिक बताते हैं कि जिले में सबसे अधिक मुंह के कैंसर के मरीज हैं। जबकि महिलाओं में बच्चेदानी व ब्रेस्ट कैंसर की मरीज हैं। उनके अनुसार यहां कैंसर की जांच व उपचार की सुविधा नहीं है। संदिग्ध मरीज मिलने पर जांच के लिए मेरठ तथा दिल्ली भेजे जाते हैं। वहां कैंसर की पुष्टि होने पर उपचार शुरू किया जाता है।
जिले में मिला फेफड़े के कैंसर का मरीज
डाॅ. अजेंद्र मलिक के अनुसार अभी तक जिले में फेफड़े के कैंसर का मरीज नहीं था। कोरोना के बाद जिले में फेफड़े के कैंसर का एक मरीज मिला है। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में मरीज का उपचार चल रहा है।
हमारे गांव के पास से कृष्णा नदी है। इसमें फैक्टरियों का पानी डाला जाता है। जिससे गांव का भूजल भी दूषित हो चुका है। इस कारण गांव में कैंसर एवं अन्य बीमारी पैर पसार चुकी है। इस समस्या को कई बार उठाया जा चुका है परंतु समाधान नहीं हो रहा है। संजीव राठी, गांगनौली गांव में कैंसर से काफी लोगों की मौत हो चुकी है। यहां कई लोग पीड़ित हैं। इसकी वजह गांव का भूजल दूषित होना है। लोगों को मजबूरी में दूषित पानी ही पीना पड़ता है। -वीरेंद्र यादव, गढ़ी कलंजरी