फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेरी मां मर गई है और पुलिस घर तक नहीं जाने दे रही

विज्ञापन
विज्ञापन
बागपत। तपती दुपहरी में प्रवासियों के काफिले मंजिल की ओर बढ़े चले जा रहे हैं। गम भी है और गुस्सा भी। सबके अपने दुख है। बरेली के लिए निकले राम प्रसाद की मां दो दिन पहले मर गई। मजबूरी में घर के लिए निकलना पड़ा, लेकिन निवाड़ा पहुंचते ही पुलिस ने रोक लिया। हरियाणा और यूपी पुलिस को दर्द बताया गया, लेकिन पुलिस कामगारों को पहले स्क्रीनिंग सेंटर ले गई। कहता है कि जिंदगी भर गम रहेगा कि मां की अंतिम यात्रा में भी शामिल नहीं हो पाया। कुछ ऐसी ही व्यथा हरियाणा के पानीपत और सोनीपत से बरेली, बलिया, सुल्तानपुर और शाहजहांपुर जाने के लिए प्रवासियों की भी है। तपती दुपहरी, प्यास से सूखता गला और आंखों में छलकते बेबसी के आंसू। करीब 500 प्रवासियों की मंजिल सिर्फ अपना घर है। मेरठ के राहुल की पत्नी की डिलीवरी का समय नजदीक है। मगर वह घर नहीं जा पा रहा है। बरेली की कमलेश बार-बार अपने बच्चों को दिलासा दे रही है कि अब जल्दी ही घर पहुंच जाएंगे, मगर वह तीन दिन से अपने बच्चों के साथ मंदिर में इंतजार कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें