बागपत। निकाय चुनाव के सहारे सभी पार्टियां लोकसभा की नींव भी तैयार कर रही है। यही कारण है कि अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को बड़े नेता जीत दिलाने और उनको बेहतर स्थिति में लाने को पूरा जोर लगा रहे हैं। क्योंकि उससे ही सभी पार्टियों को जमीनी स्तर पर अपनी स्थिति का पता चलेगा और उनको अपनी खामियां दूर करने का मौका मिलेगा।
निकाय चुनाव में सभी पार्टियों ने अध्यक्ष पद के लिए अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हुए हैं। बागपत व बड़ौत सबसे अहम है और इन जगहों पर भाजपा, रालोद, बसपा, कांग्रेस, आप सभी के प्रत्याशी है। जबकि अन्य जगहों पर भाजपा, रालोद, सपा, बसपा, कांग्रेस, आप के प्रत्याशी मैदान में उतारे हुए हैं।
इनमें भाजपा के सभी बड़े नेता सांसद, मंत्री, विधायक समेत अन्य ने अपने प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए पूरा जोर लगाया हुआ है और वह सड़कों पर घूमकर उनके लिए वोट मांग रहे हैं।
इस तरह ही रालोद के विधायक, राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर के नेता भी मैदान में उतरे हुए हैं। सपा और बसपा के नेता भी अपने प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
जिस तरह से सभी पार्टियों के बड़े नेता मैदान में उतरे हुए हैं, उनकी नजर निकाय के साथ ही लोकसभा चुनाव पर टिकी है। अब सीधे अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं और इन निकाय चुनाव से लोकसभा की नींव तैयार की जा रही है।
क्योंकि इस चुनाव में जिस पार्टी का प्रत्याशी जीतेगा या प्रत्याशी अच्छी स्थिति में रहेगा, उस पार्टी को लोकसभा चुनाव में फायदा मिलेगा। वहीं जिस पार्टी की स्थिति जहां खराब रहेगी, वहां लोकसभा चुनाव में उस पार्टी के लिए खुद को मजबूत स्थिति में लेकर आना बड़ी चुनौती रहेगी।
2.67 लाख वोटर साफ कर देते है स्थिति
जिले में तीन नगर पालिका व छह नगर पंचायतों में दो लाख 67 हजार 876 वोटर हैं। जबकि पिछली बार वर्ष 2017 के चुनाव में दो लाख नौ हजार 233 वोटर थे और इस तरह 58 हजार 643 वोटर बढ़ गए हैं। इन वोटरों के रुझान से लोकसभा की स्थिति पूरी तरह से साफ होने की उम्मीद है। इनके अलावा बागपत लोकसभा में मेरठ की सिवालखास और गाजियाबाद की मोदीनगर सीट भी आती है। जिनमें कई नगर पालिका व पंचायत है। वहां की स्थिति भी लोकसभा के रुझान काफी हद तक साफ करेगी।