बड़ौत (बागपत)। मज्जिनेंद्र जिन बिम्ब पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
सर्वप्रथम पंडित हंसमुख शास्त्री के दिशा निर्देशन में सौधर्म इंद्र द्वारा श्रीजी का अभिषेक और मोक्ष कल्याणक पूजा की गई। इसके बाद भगवान के मोक्ष जाने का मनोहारी चित्रण किया गया। भगवान मुनि सुव्रतनाथ जगह-जगह विहार किया, धर्म उपदेश दिया। मनुष्यों को धर्म के मार्ग पर लगाकर उनका कल्याण किया। मुनि सुव्रतनाथ ने जगह-जगह विहार करते हुए सम्मेदशिखर जी के निर्जरा कूट पर आकर एक माह तक अंतिम ध्यान लगाया और वही से मोक्ष में चले गए। सौधर्म इंद्र और अन्य देवों ने अपने आश्चर्य व्यक्त किए। इसके बाद अग्नि देवों द्वारा भगवान का नख शिख अंतिम संस्कार किया गया। कार्यक्रम में अग्निदेव बनने का सौभाग्य धनपाल जैन और सुधांशु जैन के परिवार को मिला। इस दौरान अनिल, कमल, आनंद, अमित, पवन, वीरेंद्र पिंटी, अतुल, धनेंद्र, गौरव, अजय, सिद्धार्थ, कृष्णा, अंजलि, निकिता, मोनिका, अंजू, दीप, सुमन सहित पानीपत, सोनीपत, दिल्ली, शामली, मेरठ, बागपत से भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।