बागपत। नवरात्र में भक्तों पर माता की कृपा बरसेगी। इस बार चौथे, छठे, आठवें नवरात्र पर रवि योग और 30 सितंबर व दो अक्तूबर को सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग में भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होगी। नवरात्र में कोई भी तिथि घट या बढ़ नहीं रही है, जो शुभ संयोग के संकेत हैं। नवरात्र में माता रानी हाथी पर सवार होकर आ रही है और उनका गमन भी हाथी पर ही होगा, जो उत्तम संकेत हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि 26 सितंबर से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। 26 सितंबर को प्रात: 3:25 बजे पर प्रतिपदा का प्रवेश होगा, जो 27 सितंबर को प्रात: 3:08 बजे तक रहेगी। नवरात्र में बनने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृत सिद्धि योग व रवि योग बनना दिव्य संयोग है।
शास्त्रों के अनुसार रवि योग संकटों से मुक्ति देकर जीवन को निर्मल बनाता है। माता रानी उत्तम वर्षा, धन-धान्य और समृद्धि का वरदान देगी। माता रानी का हाथी पर गमन होने से संसार में शांति का संदेश देंगी। नवरात्र में सही दिशा और मुहूर्त में कलश और अखंड ज्योति की स्थापना करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। इस संसार का संचालन शक्ति के बिना नहीं हो सकता है और शक्ति की आराधना में शांत चित्त आवश्यक है। पूजन में भैरव जी के तेल की अखंड ज्योति जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
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सफेद पुष्प से करें शैलपुत्री का पूजन
पहला नवरात्र में शैलपुत्री की पूजा होती है। इनके पूजन में सफेद पुष्प व अनार का फल चढ़ाना चाहिए। माता के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी की पूजा में गुड़हल का फूल एवं सेवा के साथ पंचमेवा का भोग लगाना चाहिए। माता रानी के तीसरे रूप चंद्रघंटा की पूजा में गुलाब का फूल, मिश्री और गोले का प्रसाद, चौथे स्वरूप कुष्मांडा में पेड़े का प्रसाद एवं सफेद पुष्प, पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा में अंगूर, केला, सफेद गुलाब के पुष्प, मां के छठे स्वरूप कात्यायनी की पूजा में अनारकली, अनार का फल, पंचमेवा का भोग, सातवें स्वरूप भगवती महाकाली की पूजा में गुड़हल का फूल, सेव एवं पंचमेवा, आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा पूजा में सफेद पुष्प, अनार व कच्चा नारियल और नौवें स्वरूप सिद्धि दात्री की पूजा में लाल पुष्प व पंचमेवा का विशेष महत्व होता है। नौवे नवरात्र में कन्याओं का पूजन और भोजन कराने से सुख और वैभव की प्राप्ति होती है।