बड़ौत। होली पर बाजार ग्राहकों से गुलजार होने लगे हैं। गली-मोहल्लों में भी उल्लास दिखने लगा है। बच्चों को मार्शल गन पिचकारी खूब पसंद आ रही है। ये पिचकारी रंग छोड़ने साथ ही होली के गाने भी सुनाती है।
बाजार में रंग-गुलाल, गुब्बारे, टोपी, स्प्रे कलर, कलर बम समेत तमाम उत्पादों की भरमार है। त्योहार पर बच्चों में सबसे अच्छी पिचकारी से होली खेलने की होड़ रहती है। होली आते ही बाजारों में रंग-अबीर-गुलाल के साथ ही तरह-तरह की पिचकारियों की धूम है।
व्यापारी अंकुर जैन ने बताया कि कोई वाटर गन पिचकारी तो कोई पिट्ठू पिचकारी खरीद रहा है। डोरेमान, छोटा भीम सहित मशीन गन सरीखी पिचकारियां भी बिक रही हैं। चीता, बिल्ली व कुत्ते सहित अन्य जानवरों के फेस मास्क भी बच्चे खूब खरीद रहे हैं।
दुकानदार अनुज ने बताया कि बाजार में आई मार्शल और म्यूजिकल गन पिचकारी बच्चों को काफी आकर्षित कर रही है। पिचकारी का ट्रिगर दबाने पर पानी तो निकलेगा ही, साथ ही होली के गाने भी बजेंगे। बाजार में यह पिचकारी 220 रुपये से लेकर 350 रुपये तक बिक रही है। वहीं होली पर युवा पक्के रंगों से परहेज कर जैविक गुलाल को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। क्योंकि जैविक होने के साथ ही इनकी खुशबू काफी अच्छी है।
होली खेलते समय बरतें सावधानी
बड़ौत। होली खेलते वक्त सावधानी न बरती जाए, तो यही रंग हमारे लिए खतरनाक भी हो सकते हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि होली के रंगों में मौजूद केमिकल और पेस्टिसाइड जैसी चीजों के संपर्क में आने से त्चचा, आंखों पर काफी बुरा असर पड़ सकता है। सीएचसी के अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि सूखा रंग सांस नली में चला जाता है। दमा रोगियों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक घातक हो जाती है। रंगों से खुजली, लाल चकत्ता पड़ना, त्वचा में चटकना आदि रोग हो सकते हैं। आंखों में रंग जाने से आंख लाल होना, घाव हो जाना आदि बीमारी हो सकती है।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनुज टोकस का कहना है कि होली पर बाजार में ज्यादातर केमिकल युक्त रंग ही बिकता है। जो हमारे शरीर को तमाम तरह से नुकसान पहुंचाता है। केमिकल रंगों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए एक दिन पूर्व पूरे शरीर पर तेल लगा कर सोएं। इसके अलावा रंग खेलने के पूर्व शरीर पर कोई क्रीम अवश्य लगा लें। प्रयास करें कि हर्बल रंग और गुलाल का ही प्रयोग किया जाए।
बड़ौत बाजार में दुकान में रखे मुखौटे